अमेरिका में ICE की हिरासत से रिहा हुई भारतीय मूल की Meenu Batra, कोर्ट ने दिया सख्त आदेश
Meenu Batra Release: अमेरिका में भारतीय मूल की मीनू बत्रा को डेढ़ महीने बाद ICE हिरासत से रिहा किया गया। जज ने उनकी गिरफ्तारी को अवैध बताते हुए तुरंत रिहाई का सख्त आदेश पारित किया है।
- Written By: प्रिया सिंह
भारतीय मूल की मीनू बत्रा (सोर्स-सोशल मीडिया)
Meenu Batra Release From ICE Custody: अमेरिका में 35 सालों से रह रही भारतीय मूल की 53 वर्षीय मीनू बत्रा को बड़ी राहत मिली है। उन्हें अमेरिकी इमीग्रेशन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (ICE) की हिरासत से अब आधिकारिक तौर पर पूरी तरह से रिहा कर दिया गया है। टेक्सास की अदालतों में वह हिंदी, पंजाबी और उर्दू की इकलौती लाइसेंस प्राप्त दुभाषिया के रूप में काम करती हैं। मीनू को यह बड़ी रिहाई एक संघीय न्यायाधीश के सख्त आदेश के बाद मिली है जिसमें उन्होंने हिरासत को गलत ठहराया है।
जज ने स्पष्ट रूप से कहा कि मीनू को बिना किसी उचित प्रक्रिया या स्पष्टीकरण के अवैध रूप से हिरासत में लिया गया था। उन्हें इस तरह से हिरासत में रखने की वैधता पर कड़े सवाल उठाते हुए अदालत ने तुरंत रिहा करने का सीधा आदेश दिया। इस आदेश के बाद मीनू बत्रा आखिरकार अपने घर वापस लौट आई है और उनके परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई है। अदालत ने बिना उचित नोटिस के भविष्य में उनकी दोबारा गिरफ्तारी पर भी अब पूरी तरह से कड़ी रोक लगा दी है।
एयरपोर्ट से अचानक हुई थी गिरफ्तारी
मीनू बत्रा को 17 मार्च को टेक्सास के वैली इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर उस समय अचानक गिरफ्तार किया गया था जब वह अपने काम के सिलसिले में मिल्वौकी जाने के लिए वहां मौजूद थीं। जब यह चौंकाने वाली घटना घटी। वहां से उन्हें रेमंडविले की एल वैले डिटेंशन फैसिलिटी नाम की जेल में तुरंत भेज दिया गया था।
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हिरासत में गलत व्यवहार
मीनू ने अपनी हिरासत के दौरान बताया कि यह पूरा अनुभव उनके लिए बहुत ही दुखद और अपमानजनक रहा। उन्होंने कहा कि हिरासत के दौरान उनके साथ ऐसा सख्त व्यवहार किया गया जैसे वह कोई बहुत बड़ी अपराधी हैं। करीब डेढ़ महीने तक चली इस लंबी कानूनी लड़ाई के बाद 30 अप्रैल को उन्हें आखिरकार आजादी मिल ही गई।
मीनू के वकील दीपक अहलूवालिया ने कोर्ट में दलील दी कि सरकार अपनी कार्यवाही को सही ठहरने में विफल रही है। दशकों से अमेरिका में रह रही और काम कर रही महिला को अचानक हिरासत में लेने का कोई कारण नहीं बताया गया। वकील ने कहा कि सरकार पहले किसी को गिरफ्तार करके बाद में उस कदम को बिल्कुल भी जायज नहीं ठहरा सकती है।
गिरफ्तारी का मुख्य कारण
मीनू बत्रा पिछले 35 वर्षों से अमेरिका में सुरक्षित रह रही हैं और उनके चार बच्चे वहां के वैध अमेरिकी नागरिक हैं। रिकॉर्ड के अनुसार मीनू को साल 2000 में अमेरिका से निर्वासन का एक अंतिम आदेश जारी किया गया था। अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने बिना कानूनी अनुमति के अमेरिका में प्रवेश किया था और नागरिकता नहीं ली थी।
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इस मामले ने पूरे अमेरिका में मानवाधिकार और कानूनी प्रक्रियाओं पर एक बहुत ही बड़ी बहस छेड़ दी है। उनकी इस अचानक हुई गिरफ्तारी पर अमेरिकी कांग्रेस सांसद जोकिन कास्त्रो ने भी अपनी बहुत तीखी प्रतिक्रिया दी थी। हालांकि अब अदालत के फैसले के बाद मीनू बत्रा को बड़ी राहत मिली है और न्याय व्यवस्था पर भरोसा बड़ा है।
