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राजशाही से लेकर…संविधान तक, 5 मौके जब शांत रहने वाले नेपाल में भड़क उठी हिंसा, जानिए पूरा इतिहास
Nepal Protest: नेपाल में सरकार विरोधी प्रदर्शन के दौरान अब तक 16 लोगों की मौत हुई है, 100 से अधिक घायल हैं। काठमांडू में कर्फ्यू लगा है और हिंसक प्रदर्शनों का इतिहास फिर से दोहराया गया है।
- Written By: अक्षय साहू

नेपाल में सरकार के खिलाफ भड़की हिंसा (फोटो- सोशल मीडिया)
Nepali Gen Z Protests: नेपाल में सरकार द्वारा सोशल मीडिया पर बैन लगाने को लेकर भारी विरोध हो रहा है। हजारों छात्र सड़कों पर उतरकर अपनी ही सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका आरोप है कि सरकार सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाकर उनकी आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है।
सरकार के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन में अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि 100 से ज्यादा लोग घायल हो गए है। सरकार ने राजधानी काठमांडू के कई इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया है और प्रदर्शनकारियों को देखते ही गोली मारने की आदेश जारी कर दिया है। हालांकि यह पहली बार नहीं है जब नेपाल में इस प्रकार की हिंसा भड़की हो। नेपाल में हिंसक प्रदर्शनों के एक लंबा इतिहास रहा है। पिछले 10 साल में ही ऐसे कई मौके आए जब आमतौर पर शांत रहने वाले नेपाल में हिंसा भड़क उठी। आइए आपको कुछ ऐसी ही घटनाओं के बारे में बताते हैं…
नया संविधान को लेकर विवाद और हिंसा
सितंबर 2015 में नेपाल ने बहुप्रतीक्षित नया लोकतांत्रिक संविधान लागू किया। लेकिन यह संविधान कुछ समुदायों विशेषकर मधेसी और थारु को प्रतिनिधित्व और नागरिकता के मामलों में भेदभावपूर्ण लगा। इसके विरोध में भारत-नेपाल सीमा पर सड़कें जाम कर दी गईं, जिससे देश में पेट्रोल, दवाइयों और आवश्यक वस्तुओं की भारी कमी हो गई। इस आंदोलन में 50 से अधिक लोग मारे गए, और यह एक मानवीय संकट में बदल गया।
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From Kathmandu to towns across Nepal, the message is clear: democracy cannot survive without freedom of speech and accountability. What’s happening in Nepal is not just a protest , it’s a people’s uprising against censorship and corruption. When a government bans X,… pic.twitter.com/Gpye9SvRUM — 𝑺𝒉𝒂𝒉𝒆𝒆𝒏🌺 (@shaheena451) September 8, 2025
टिकापुर नरसंहार
इसी वर्ष, टिकापुर (कैलाली जिला) में थारु समुदाय और पुलिस के बीच भीषण झड़प हुई, जिसमें 6 पुलिसकर्मियों और एक दो वर्षीय बच्चे की मौत हो गई। इस घटना ने नेपाल की जातीय राजनीति में गहरी दरार उजागर कर दी।
राजशाही की वापसी की मांग
2008 में राजशाही समाप्त होने के बाद भी, नेपाल में राजतंत्र समर्थक विचार पूरी तरह समाप्त नहीं हुए। नवंबर 2023 में हजारों लोग सड़कों पर उतरे, जिन्होंने राजशाही बहाली और नेपाल को हिन्दू राष्ट्र घोषित करने की मांग की। इन प्रदर्शनों को नागरिक अभियान का समर्थन मिला। पुलिस की कार्रवाई में 200 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया। यह सिलसिला अप्रैल 2024 तक चलता रहा।
#Nepal_protests 🇳🇵✊
The death toll in the Nepal protest has risen to 14, Reuters reported.
Thousands of people hit the streets in #Kathmandu to protest against the #Nepal government’s ban on #socialmedia platforms, including Facebook, X (formerly Twitter), and YouTube. pic.twitter.com/ByLBUbZyyH — Qatar Tribune (@Qatar_Tribune) September 8, 2025
राजशाही बनाम लोकतंत्र आंदोलन
मार्च 2025 में एक ही दिन दो विरोध प्रदर्शन हुए एक ओर थे राजशाही समर्थक, दूसरी ओर गणतंत्र समर्थक। काठमांडू में तनाव बढ़ा, कर्फ्यू लगाया गया और सेना तैनात की गई। इन प्रदर्शनों ने यह स्पष्ट कर दिया कि नेपाल में राजनीतिक ध्रुवीकरण गहराता जा रहा है।
यह भी पढ़ें: श्रीलंका-बांग्लादेश के बाद अब भारत के तीसरे पड़ोसी की बारी, कौन कर रहा है पर्दे के पीछे से साजिश?
शिक्षक संघ का देशव्यापी हड़ताल
नेपाल शिक्षक महासंघ (NTF) ने School Education Bill के विरोध में देशभर में शिक्षकों की हड़ताल की घोषणा की। उनकी मुख्य मांगें थीं नौकरी की सुरक्षा, समान वेतन, और शिक्षक प्रबंधन का अधिकार स्थानीय सरकारों को न देना। आंदोलन के दौरान उग्र प्रदर्शन हुए, मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा और वार्षिक परीक्षाएं तक स्थगित हो गईं। आखिरकार 9 बिंदुओं पर समझौता हुआ और आंदोलन समाप्त हुआ।
Nepal monarchy to constitution 5 violent turns in peaceful history
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