रात 8:16 बजे थमेगा वक्त! आज सूरज और धरती के बीच बन रहा ये खास संयोग, जानें क्या है ‘मार्च इक्विनॉक्स’
March Equinox: 20 मार्च 2026 को 'मार्च इक्विनॉक्स' की खगोलीय घटना होने वाली है। इस दिन पृथ्वी पर दिन और रात की लंबाई बराबर होगी और उत्तरी गोलार्ध में वसंत ऋतु का आधिकारिक आगाज होगा।
- Written By: अमन उपाध्याय
वर्नल इक्विनॉक्स, एआई फोटो
What Is Vernal Equinox: खगोलीय घटनाओं में रुचि रखने वाले लोगों के लिए 20 मार्च 2026 का दिन बेहद खास होने वाला है। इस दिन दुनिया एक ऐसी घटना की गवाह बनेगी जो साल में केवल दो बार होती है। इसे विज्ञान की भाषा में ‘मार्च इक्विनॉक्स’ (March Equinox) या ‘वर्नल इक्विनॉक्स’ (Vernal Equinox) कहा जाता है। इस विशेष दिन पर हमारी पृथ्वी पर दिन और रात की लंबाई लगभग बराबर, यानी 12-12 घंटे की होती है।, यह घटना न केवल आसमान में होने वाला एक बदलाव है, बल्कि यह पूरी दुनिया के मौसम में आने वाले एक बड़े परिवर्तन का भी संकेत है।
क्या है मार्च इक्विनॉक्स का सही समय?
खगोलविदों के अनुसार, साल 2026 में मार्च इक्विनॉक्स की यह स्थिति भारतीय समयानुसार (IST) 20 मार्च को रात करीब 8:16 बजे (14:46 UTC) पर बनेगी। यह वह सटीक पल होगा जब सूर्य की किरणें सीधे पृथ्वी की भूमध्य रेखा (Equator) पर पड़ेंगी। इसके प्रभाव से पृथ्वी के लगभग हर हिस्से में दिन और रात की अवधि एक समान हो जाती है, जिसे वैज्ञानिक ‘संतुलन’ का पल भी कहते हैं।
क्यों बनती है ऐसी स्थिति?
पृथ्वी अपनी धुरी पर थोड़ी झुकी हुई है और इसी झुकाव के कारण साल भर अलग-अलग मौसमों का चक्र चलता रहता है। हालांकि, साल में दो बार ऐसी स्थिति आती है जब सूर्य की रोशनी दोनों गोलार्धों (Hemispheres) पर लगभग बराबर पड़ती है। जब सूर्य भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर होता है तब इक्विनॉक्स की स्थिति उत्पन्न होती है। मार्च में होने वाली इस घटना को ‘स्प्रिंग इक्विनॉक्स’ भी कहा जाता है क्योंकि यह वसंत के आगमन का प्रतीक है।
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भारत पर इसका प्रभाव और बदलता मौसम
भारत समेत उत्तरी गोलार्ध के देशों में इस घटना के बाद से मौसम में तेजी से बदलाव महसूस होने लगेगा। 20 मार्च के बाद से उत्तरी गोलार्ध में दिन धीरे-धीरे बड़े होने लगेंगे और रातें छोटी होने लगेंगी। भारत के संदर्भ में इसका अर्थ यह है कि अब कड़ाके की सर्दी को पूरी तरह विदा कहने और चिलचिलाती गर्मी का स्वागत करने का समय आ गया है।
यह समय प्रकृति के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। वातावरण में हल्की गर्माहट आने के साथ ही पेड़-पौधों में नई कोंपलें आने लगती हैं और फसलों के पकने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। यह वसंत ऋतु की आधिकारिक शुरुआत होती है, जिसमें प्रकृति अपने पूरे निखार पर होती है।
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साल में दो बार आता है यह अवसर
दिलचस्प बात यह है कि इक्विनॉक्स की यह स्थिति साल में दो बार आती है पहली मार्च में और दूसरी सितंबर में। मार्च वाला इक्विनॉक्स जहां उत्तरी गोलार्ध में वसंत लाता है, वहीं सितंबर में होने वाला इक्विनॉक्स शरद ऋतु (Autumn) की शुरुआत का संकेत देता है। उस समय दक्षिणी गोलार्ध में वसंत का मौसम शुरू होता है। इस प्रकार, यह खगोलीय घटना पृथ्वी के दोनों हिस्सों में मौसम के संतुलन को बनाए रखने का कार्य करती है।
