भारत ने कराया नेपाल में तख्तापलट! हिंसा के बाद केपी ओली की पहली महारैली, अंतरिम सरकार पर बोला हमला
Nepal Political Crisis: पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने नेपाल की राजनीति में फिर से हलचल मचाई, संसद बहाली की मांग की और जेन-Z आंदोलन को चुनावों को पटरी से उतारने की साजिश बताया।
- Written By: अक्षय साहू
केपी ओली ने तख्तापलट के लिए भारत को जिम्मेदार बताया (सोर्स- सोशल मीडिया)
KP Oli Target India: नेपाल की राजनीति एक बार फिर मुश्किल दौर से गुजर रही है। पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने हाल ही में एक रैली का आयोजन किया और इसमें उन्होंने कई मुद्दों पर अपनी राय रखी। ओली ने खासतौर पर भारत पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी सरकार गिराने के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ था। इसके अलावा, उन्होंने भंग संसद को बहाल करने की मांग भी की।
केपी ओली ने यह बयान तब दिया है जब नेपाल में अगले साल चुनाव होने वाले हैं। ओली ने कहा कि बिना संविधानिक प्रक्रिया के संसद को भंग किया गया था और अब सबसे जरूरी काम उसे फिर से बहाल करना है। उन्होंने यह भी कहा कि पहले प्रतिनिधि सभा को बहाल किया जाए, फिर एक संवैधानिक सरकार बने और बाद में चुनाव कराए जाएं।
जेन-Z आंदोलन और सरकार की आलोचना
पूर्व प्रधानमंत्री ओली ने जेन-Z आंदोलन और सरकार के बीच हुए समझौते पर भी आलोचना की। उन्होंने इसे एक हाई वोल्टेज ड्रामा बताया और आरोप लगाया कि यह सब चुनाव को पटरी से उतारने की साजिश है। ओली के मुताबिक, अंतरिम सरकार चुनाव की तैयारी नहीं कर रही है और देश में न तो सुरक्षित माहौल है, न राजनीतिक गतिविधियों की स्वतंत्रता और न ही पारदर्शिता। उनका कहना था कि बिना इन चीजों के निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं हैं।
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इसके अलावा, ओली ने यह भी संकेत दिया कि उनकी सरकार गिरने के पीछे विदेशी दबाव हो सकता है। उन्होंने सीमा विवादों, जैसे लिंपियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी के मुद्दे का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी नीतियों को कुछ ताकतें पसंद नहीं करती थीं। उन्होंने 2015 में हुए मधेश आंदोलन और सीमा नाकेबंदी का भी जिक्र किया, जब उनकी सरकार पर बल प्रयोग के आरोप लगे थे।
जनरल कन्वेंशन बनी चुनौती
ओली के लिए पार्टी का जनरल कन्वेंशन एक बड़ी चुनौती बन गया है। इस मीटिंग में 2,262 प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं और 15 सदस्यीय शीर्ष नेतृत्व के लिए चुनाव होंगे। ओली खुद पार्टी अध्यक्ष पद के दावेदार हैं और इसके लिए उन्होंने पहले ही पार्टी के नियमों में बदलाव कर लिया है।
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यह कन्वेंशन नेपाल की राजनीति में इस लिहाज से महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे यह तय होगा कि ओली भविष्य में सत्ता में वापसी के लिए किस रास्ते पर चलेंगे। क्या वह संसद की बहाली की दिशा में कदम बढ़ाएंगे या फिर चुनावों की ओर बढ़ेंगे? यही सवाल अब नेपाल की राजनीति में सबसे अहम बन गया है।
