एस जयशंकर, अयाज सादिक (सोर्स- सोशल मीडिया)
S Jaishankar Ayaz Sadiq Handshake Controversy: भारत-पाकिस्तान के बीच लगातार तनाव बना हुआ है, और इस बीच ढाका से एक तस्वीर ने पाकिस्तानी राजनीति में हलचल मचा दी है। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और पाकिस्तान के नेशनल असेंबली के स्पीकर अयाज सादिक के बीच हुई मुलाकात पर बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। अयाज सादिक ने दावा किया कि जयशंकर खुद उनके पास चलकर आए थे।
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के अंतिम संस्कार में हिस्सा लेने के लिए जयशंकर और सादिक दोनों ही ढाका पहुंचे थे। इस दौरान, दोनों नेताओं के बीच पहली बार सार्वजनिक रूप से मुलाकात हुई। मई में हुए सैन्य टकराव के बाद यह भारत और पाकिस्तान के प्रमुख नेताओं की पहली मुलाकात मानी जा रही है।
पाकिस्तान के जियो टीवी से बातचीत में अयाज सादिक ने दावा किया कि भारतीय प्रतिनिधिमंडल के नेतृत्व में एस. जयशंकर संसद के वेटिंग रूम में पहुंचे थे। सादिक ने कहा कि जयशंकर ने खुद चलकर उनके पास आकर हाथ मिलाया। इस मुलाकात में पाकिस्तान के अलावा मालदीव, नेपाल, भूटान और बांग्लादेश के अधिकारी पहले से मौजूद थे।
وزیرخارجہ جے شنکر سے ملاقات کا احوال سناتے ہوئے:
میں کمرے میں موجود تھا جے شنکر اندر آئے، سیدھا میرے پاس آ کر کھڑے ہوئے، ہیلو کیا اور اپنا تعارف کروایا، میں نے تعارف کروایا تو انہوں نے کہا میں آپ کو جانتا ہوں۔ pic.twitter.com/A7XhFrIV2K — صحرانورد (@Aadiiroy2) December 31, 2025
अयाज सादिक के मुताबिक, भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सभी अधिकारियों से मिलकर सबसे पहले पाकिस्तान के प्रतिनिधि से हाथ मिलाया। सादिक ने बताया कि जयशंकर ने उनका परिचय लेने की बजाय कहा, “मैं आपको पहचानता हूं, परिचय की जरूरत नहीं है।” यह घटना उस समय हुई जब वह पाकिस्तान के हाई कमिशनर से बातचीत कर रहे थे।
सादिक ने यह भी कहा कि जयशंकर इस मुलाकात को पूरी तरह से सार्वजनिक करने का उद्देश्य समझते थे। कैमरे और मीडिया के साथ उनकी मुलाकात का रिकॉर्ड होना इस बात का संकेत है कि यह मुलाकात सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि राजनीतिक दृष्टिकोण से भी अहम थी। क्या जयशंकर के इस कदम से दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव में कोई हल निकलेगा?
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अयाज सादिक ने इस मुलाकात का महत्व समझते हुए दावा किया कि जयशंकर ने जानबूझकर इसे रिकॉर्ड करवाया ताकि इसका असर व्यापक रूप से देखा जा सके। क्या इस मुलाकात से पाकिस्तान और भारत के रिश्तों में सुधार की कोई संभावना बनी है, या यह केवल एक राजनीतिक शगुफा है?