इजराइल के हमले में हूती प्रधानमंत्री की मौत, रक्षा मंत्री काट्ज ने दिए बड़े हमले के संकेत
Israel-Yemen War: इजरायली हमले में हूती समूह के प्रधानमंत्री अहमद अल-रहवी की सना में मौत हो गई, जिससे दोनों पक्षों के बीच तनाव और बढ़ गया है। इजराइल ने इसे जवाबी कार्रवाई बताया।
- Written By: अक्षय साहू
हूती प्रधानमंत्री अहमद अल-रहवी (फोटो- सोशल मीडिया)
Houthi PM Ahmed al-Rahawi: इजराइल और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच तनाव जारी है। शुक्रवार को इजरायली रक्षा बलों (IDF) के हमले में हूती समूह के प्रधानमंत्री अहमद अल-रहवी की मौत हो गई। इस बात की जानकारी यमनी मीडिया आउटलेट्स अल-जुम्हूरिया और अदन अल-घद ने दी। मीडिया सुत्रों ने दावा किया कि अहमद अल-रहवी शुक्रवार को सना में एक अपार्टमेंट पर हुए इजरायली हमले में मारे गए।
मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि, इजराइली हमले में अहमद अल-रहवी के कई सहयोगी भी इस हमले में मारे गए। हालांकि, इजरायली रक्षा बलों ने फिलहाल इस हमले को लेकर किसी भी प्रकार का कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
बड़े हमले की तैयारी में इजराइल
इजरायली सेना (IDF) ने कहा कि उन्होंने सना के पास हूती विद्रोहियों के एक सैन्य ठिकाने को निशाना बनाकर हमला किया था। यह कार्रवाई उस दिन की गई जब इजराइल ने अपने इलाके में दो ड्रोन हमलों को रोकने की जानकारी दी थी। इजराइली रक्षा मंत्री ने बताया कि यह हमला इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और सेना के बड़े अधिकारियों की अनुमति से किया गया।
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इजराइल काट्ज ने एक बयान में कहा, “अंधकार की विपत्ति के बाद जेठा की विपत्ति आती है।” इससे यह संकेत मिलता है कि हमले का निशाना हूती समूह के ऊंचे पदों पर बैठे नेता हो सकते हैं। यह बात पहले आई कुछ इजरायली मीडिया रिपोर्ट्स से भी मेल खाती है, जिनमें कहा गया था कि ईरान समर्थित इस समूह के राजनीतिक नेताओं को ही निशाना बनाया गया है।
हूती विद्रोहियों ने किया इनकार
हालांकि, हूती विद्रोहियों ने इस दावे को गलत बताया है। उनका कहना है कि इजराइल ने आम लोगों की इमारतों को निशाना बनाया और यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है। यमन के स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी इस हमले को ‘युद्ध अपराध’ बताया है। कुछ दिन पहले ही हूतियों ने इजराइल पर मिसाइल हमला करने की जिम्मेदारी ली थी, जिसे इजराइल ने नाकाम कर दिया था।
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गाजा युद्ध शुरू होने के बाद से ही हूती विद्रोही लगातार इजराइल पर हमले करते रहे हैं। वो इसे इजराइल के विरुद्ध फिलिस्तीन का समर्थन मानने हैं। उनका कहना है कि वो तब तक इजराइल पर हमले करते रहेंगे, जब तक वो उसे पूरी तरह से न मिटा दें।
(एजेंसी इनपुट के साथ)
