ईरान ने तुर्की में NATO बेस पर हमला किया (सोर्स- सोशल मीडिया )
Iran Attack NATO Base in Turkey: मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच तनाव बहुत बढ़ गया है। ईरान ने अमेरिकी और इजरायली हमलों का जवाब देने के लिए खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया। अब खबरें आ रही हैं कि ईरान ने तुर्की में NATO के एक बेस को भी निशाना बनाया है। यह बात इसलिए चिंताजनक है क्योंकि माना जाता है कि इस बेस पर न्यूक्लियर हथियार भी रखे गए हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया कि ईरान ने तुर्की के दक्षिण में स्थित इनसिरलिक एयर बेस पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। यह बेस अमेरिकी सैन्य उपकरणों और NATO के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। क्योंकि इस बेस से NATO पूरे मिडिल ईस्ट पर नजर रखता है।
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें मिसाइल बेस के ऊपर से गुजरती दिखाई दी और आस-पास के शहरों में सायरन बजने लगे। रूस के सरकारी मीडिया RT ने भी इस घटना को हाइलाइट किया।
Video which appears to show a unknown ballistic missile in the sky over NATO’s Incirlik Air Base in Turkey, following reports of air raid sirens and explosions heard earlier in several towns surrounding Incirlik. pic.twitter.com/3apDnVyWQi — OSINTdefender (@sentdefender) March 13, 2026
हालांकि, सोशल मीडिया और फैक्ट-चेक ने यह स्पष्ट किया कि वायरल वीडियो असली घटना नहीं दिखा रहा। जांच में पता चला कि यह वीडियो जनवरी 2026 में सीरिया के अलेप्पो का है, न कि इनसिरलिक एयर बेस का। वीडियो में दिखाया गया मलबा बेस से लगभग 150 किलोमीटर दूर गिरा था।
असल में, मार्च 2026 में तुर्की के पास दो बार ईरानी मिसाइलें इंटरसेप्ट की गईं। 4 मार्च को NATO एयर डिफेंस ने एक ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल को रोक दिया, जो इराक और सीरिया से तुर्की में घुसी थी। इस इंटरसेप्शन का मलबा इनसिरलिक के पास हाटे प्रांत में गिरा। 9 मार्च को दूसरी मिसाइल को अमेरिकी नेवी के SM-3 इंटरसेप्टर ने रोक दिया, और उसका मलबा गाजियांटेप में गिरा। किसी भी हमले में कोई सीधा हिट या हताहत नहीं हुआ। इन घटनाओं के बाद, तुर्की ने ईरानी एम्बेसडर को बुलाया और अपने बेस पर अतिरिक्त एयर डिफेंस बैटरी तैनात की। तुर्की ने अपने एयरस्पेस उल्लंघन की भी कड़ी निंदा की।
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इस तरह, जबकि ऑनलाइन दावे और वीडियो डरावने लग रहे थे, असल घटना में NATO बेस पर कोई सीधा हमला या न्यूक्लियर हथियार को नुकसान नहीं हुआ। लेकिन यह घटनाएं मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और संभावित सुरक्षा खतरों को उजागर करती हैं।