
पाकिस्तान की नई साजिश, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
ISI Pakistan Terror Funding: भारतीय खुफिया एजेंसियों ने पाकिस्तान की एक बेहद खतरनाक और नई चाल का पर्दाफाश किया है। स्रोतों के अनुसार, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) और पाकिस्तानी सेना अब आतंकवाद को ‘पीढ़ी-दर-पीढ़ी’ आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। इसके तहत पुराने पड़ चुके आतंकी आकाओं की जगह अब उनके बेटों और रिश्तेदारों को कमान सौंपी जा रही है।
हाल ही में पाकिस्तान के बहावलपुर में आईएसआई और पाकिस्तानी आर्मी की देखरेख में एक बड़ी गुप्त बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के ‘सेकंड जेनरेशन’ यानी अगली पीढ़ी के कमांडरों ने हिस्सा लिया।
सूत्रों के मुताबिक, इस मीटिंग में लश्कर का आतंकी और हाफिज सईद का बेटा तल्हा सईद, सैफुल्लाह कसूरी और जैश प्रमुख मसूद अजहर का भाई अब्दुल रऊफ मौजूद थे। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य जम्मू-कश्मीर में बड़े स्तर पर घुसपैठ कराना और आतंकी वारदातों को अंजाम देना है।
खुफिया सूत्रों का कहना है कि हाफिज सईद और मसूद अजहर जैसे पुराने सरगना अब बढ़ती उम्र और बीमारी के कारण उतने प्रभावी नहीं रहे। इसके अलावा, उन पर बढ़ते अंतरराष्ट्रीय दबाव की वजह से आईएसआई अब नए चेहरों को ‘ग्रूम’ कर रही है। तल्हा सईद को विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय संपर्कों और फंडिंग नेटवर्क की ट्रेनिंग दी जा रही है, जबकि अब्दुल रऊफ को रणनीतिक योजना और सीमा पार अभियानों के समन्वय के लिए तैयार किया जा रहा है।
एक और चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ है कि लश्कर-ए-तैयबा का मुख्यालय मरकज-ए-तैयबा (मुरिदके), जो मई 2025 में भारतीय सेना के ऑपरेशन ‘सिंदूर’ में तबाह हो गया था, उसे फिर से सक्रिय किया जा रहा है।
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इसे खड़ा करने के लिए आईएसआई, पाक आर्मी और वहां की ‘स्टेट स्पॉन्सर्ड एनजीओ’ द्वारा बड़े पैमाने पर फंडिंग की जा रही है। जानकारी के अनुसार, जनवरी 2026 में यहां प्रशिक्षित आतंकियों की पासिंग-आउट परेड की भी तैयारी चल रही है, जिसके बाद उन्हें सक्रिय मोर्चों पर तैनात किया जाएगा।
खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि पहलगाम हमले से पहले भी इसी तरह की गुप्त बैठकें हुई थीं। फिलहाल, भारतीय सुरक्षा एजेंसियां मुरिदके और सीमावर्ती इलाकों पर कड़ी निगरानी रख रही हैं ताकि किसी भी घुसपैठ की कोशिश को नाकाम किया जा सके।






