ईरान-अमेरिका जेनेवा मीटिंग बाद टकराव तेज, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Iran US Geneva Meeting: ईरान और अमेरिका के बीच चल रही परमाणु वार्ता एक बार फिर सैन्य तनाव की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। स्विट्जरलैंड के जेनेवा में मंगलवार को आयोजित दूसरे दौर की परोक्ष वार्ता मात्र चार घंटे से थोड़े अधिक समय में ही समाप्त हो गई। यह बैठक एक तरफ ओमान की मध्यस्थता में चल रही कूटनीति और दूसरी तरफ खाड़ी में बढ़ते युद्ध के बादलों के बीच आयोजित की गई थी।
एक तरफ जहां वार्ता चल रही थी वहीं दूसरी ओर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने ओमान के तट पर तैनात अमेरिकी युद्धपोतों पर कड़ा प्रहार किया। खामेनेई ने अमेरिकी सैन्य शक्ति को चुनौती देते हुए कहा कि युद्धपोत तो खतरनाक होते हैं लेकिन युद्धपोत से भी अधिक खतरनाक ईरान हथियार है जो उसे समुद्र की गहराई में डुबो सकता है।
इसके साथ ही ईरान ने ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ के कुछ हिस्सों को लाइव-फायर सैन्य अभ्यास के लिए बंद करने की घोषणा कर दी जिससे वैश्विक व्यापारिक शिपिंग में अफरा-तफरी का खतरा पैदा हो गया है।
इस बैठक में अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व राष्ट्रपति ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और उनके दामाद जारेड कुशनर कर रहे थे, जबकि ईरानी पक्ष का नेतृत्व विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने किया। बातचीत का मुख्य केंद्र परमाणु कार्यक्रम पर संयुक्त राष्ट्र की निगरानी और यूरेनियम भंडार का प्रबंधन था। ईरान ने अपने 60% समृद्ध यूरेनियम के भंडार को कम करने की पेशकश की है, लेकिन वह इस भंडार को विदेश भेजने के सख्त खिलाफ है।
स्रोतों के अनुसार, तेहरान ने ट्रंप प्रशासन को लुभाने के लिए एक ‘समृद्धि पैकेज’ का प्रस्ताव भी दिया है। इसमें तेल, गैस, खनन निवेश और यहां तक कि विमानों की खरीद में अमेरिकी हितों को शामिल करने की बात कही गई है। ईरान का तर्क है कि यदि अमेरिका के व्यापारिक हित ईरान से जुड़ते हैं तो भविष्य में प्रतिबंधों या सैन्य कार्रवाई का विरोध करने वाला एक अमेरिकी लॉबी समूह तैयार हो सकेगा।
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वार्ता के बीच जेनेवा में संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के बाहर ईरानी सरकार के खिलाफ भारी प्रदर्शन हुए। वहीं, ईरान के भीतर भी एक ‘नेशनल साल्वेशन फ्रंट’ का गठन हुआ है जो देश के भविष्य के लिए जनमत संग्रह की मांग कर रहा है। जवाब में ईरानी सुरक्षा बलों ने हजारों प्रदर्शनकारियों और कई सुधारवादी नेताओं को गिरफ्तार किया है।