महायुद्ध टालने की आखिरी कोशिश! पाकिस्तान के जरिए ईरान ने व्हाइट हाउस भेजा परमाणु समझौते का ‘नया प्रस्ताव’
Iran US Nuclear Deal: ईरान ने अमेरिका को परमाणु समझौते के लिए 'आखिरी प्रस्ताव' भेजा है। पाकिस्तान के जरिए भेजे गए इस प्रस्ताव में होर्मुज खोलने और $100 अरब की राहत राशि की मांग की गई है।
- Written By: अमन उपाध्याय
मोजतबा खामेनेई और डोनाल्ड ट्रंप, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Iran US Nuclear Deal Final Proposal: मीडिल ईस्ट में जारी तनाव और अमेरिकी हमले के बढ़ते खतरे के बीच ईरान ने एक बड़ा कूटनीतिक दांव चला है। ईरान ने परमाणु समझौते को लेकर अमेरिका के सामने अपना ‘आखिरी प्रस्ताव’ पेश कर दिया है। यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब दुनिया एक बड़े सैन्य संकट की आशंका से डरी हुई है। विशेष बात यह है कि ईरान ने यह अहम दस्तावेज पाकिस्तान के मध्यस्थों के माध्यम से व्हाइट हाउस तक पहुंचाया है।
पाकिस्तान, रूस-ओमान से भी चर्चा
ईरान की समाचार एजेंसी के अनुसार, इस अंतिम प्रस्ताव को तैयार करने से पहले ईरान ने अपने रणनीतिक साझेदारों रूस, ओमान और पाकिस्तान के साथ चर्चा की है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस प्रस्ताव को पाकिस्तानी मध्यस्थों को सौंपा ताकि इसे अमेरिकी प्रशासन तक पहुंचाया जा सके। अमेरिका की ओर से अब इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेना है।
हॉर्मुज पर ईरान की कड़ी शर्तें
ईरान के इस नए प्रस्ताव का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा Strait of Hormuz से जुड़ा है जो दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद संवेदनशील मार्ग है। ईरान ने प्रस्ताव में होर्मुज को पूर्ण रूप से खोलने का सुझाव दिया है लेकिन इसके लिए अपनी शर्तें भी रखी हैं।
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ईरान की मांग है कि होर्मुज के बाहर लगी अमेरिकी नाकाबंदी को तुरंत खत्म किया जाए। इसके साथ ही, ईरान ने इस 34 किलोमीटर चौड़े मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलने का अधिकार मांगा है। हालांकि, ईरान के सर्वोच्च नेता मुज्तबा खामेनेई के करीबियों का कहना है कि वे व्यक्तिगत रूप से इस प्रस्ताव की निगरानी कर रहे हैं और होर्मुज के रणनीतिक हितों पर कोई बड़ा समझौता नहीं करेंगे।
$100 अरब की मांग
परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी ईरान ने अपनी स्थिति इस बार साफ की है। ईरान चाहता है कि वह अगले 10 वर्षों तक यूरेनियम संवर्धन को सीमित रखे, जबकि अमेरिका इस अवधि को कम से कम 20 साल तक ले जाना चाहता है। इसके अलावा, ईरान ने आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने की प्रक्रिया के शुरुआती चरण में ही कम से कम $100 अरब की वित्तीय सहायता की मांग की है। ईरान का तर्क है कि इस राशि का उपयोग देश में राहत और बचाव कार्यों के लिए किया जाएगा।
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IRGC की अगली रणनीति
इस प्रस्ताव को तैयार करने में ईरान की शक्तिशाली इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) की भी अहम भूमिका रही है। रिपोर्टों के अनुसार, विदेश मंत्री अराघची सीधे तौर पर IRGC के अधिकारियों के संपर्क में हैं। समझौते की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए ईरान की ओर से संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबफ नेतृत्व कर रहे हैं। जबकि अमेरिका ने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को यह जिम्मेदारी सौंपी है।
