दुनिया की 'एनर्जी लाइफलाइन' पर संकट: होर्मुज में 90% जहाजों की आवाजाही ठप, समंदर के बीच फंसे 20,000 नाविक

Strait Of Hormuz Shipping Plunge: पश्चिम एशिया में जंग के चलते हॉर्मुज में यातायात 90% गिर गया है। करीब 870 जहाज और 20,000 नाविक बीच समुद्र में फंसे हुए हैं। जिससे ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा खतरा मंडरा रहा।
Crisis on the World's 'Energy Lifeline': 90% of Shipping Traffic Halted in the Strait of Hormuz; 20,000 Sailors Stranded at Sea
सांकेतिक फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Strait Of Hormuz Shipping Plunge Global Energy Crisis: पश्चिम एशिया में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच तनाव ने दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति की रीढ़ मानी जाने वाली स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लगभग ठप कर दिया है। समुद्री सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, इस जलमार्ग से होने वाली जहाजों की आवाजाही में करीब 90% से अधिक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। यह संकट तब शुरू हुआ जब अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के जवाब में तेहरान ने जवाबी कार्रवाई शुरू की।

यातायात में ऐतिहासिक गिरावट

मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) की रिपोर्ट के अनुसार, 28 फरवरी को ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत के बाद शुरू हुए इस तनाव से पहले इस मार्ग से रोजाना लगभग 130 जहाज गुजरते थे। लेकिन अब यह संख्या घटकर 10 जहाजों से भी कम रह गई हैं। 1 मार्च से 27 अप्रैल के बीच खाड़ी क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों से जुड़ी 40 से अधिक घटनाएं दर्ज की गई हैं। जिनमें जहाजों को निशाना बनाना, उत्पीड़न और ड्रोन हमलों में हुए नुकसान शामिल हैं।

समंदर के बीच फंसे 20,000 नाविक

दोनों देशों के इस तनाव में खाड़ी के अंदर हजारों नाविक फंसे हुए हैं। UKMTO के अधिकारियों ने बताया है कि लगभग 850 से 870 बड़े व्यापारिक जहाज वर्तमान में इस जलमार्ग में सुरक्षा जोखिमों के चलते वे जहां के तहां है फंसे हुए हैं। UKMTO के ऑपरेशंस हेड कमांडर जो ब्लैक ने एक बयान में कहा कि हमारी पहली प्राथिमकता नाविकों की सुरक्षा है। इस मार्ग पर करीब 20,000 नाविक उन जहाजों पर सवार हैं जो कहीं नहीं जा पा रहे हैं। उन्होंने यह भी आगाह किया कि समुद्र में लंबे समय तक कैद रहने से जहाज के चालक दल के सदस्यों के मानसिर स्वास्थय पर गंभीर असर पड़ सकता है।

वैश्विक ऊर्जा संकट और बढ़ता जोखिम

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण शिपिंग मार्ग है जो वैश्विक तेल और गैस निर्यात के लिए मुख्य मार्ग है। वाशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ते तनाव ने अंतराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर गहरी चिंता पैदा कर दी है।

इसको लेकर विशेषज्ञों का भी मानना है कि इस क्षेत्र में निरंतर अस्थिरता के चलते न केवल खाड़ी देशों के व्यापार को प्रभावित करेगी बल्कि सोमालिया के तट के पास समुद्री डकैती के खतरों को भी फिर से पैदा कर सकती है। अभी फिलहाल UKMTO हाई अलर्ट पर है और वैश्विक शिपिंग के लिए इसे हाल के वर्षों की सबसे अस्थिर अवधि करार दिया गया है।

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