ईरान को लेकर मैदान में उतरे पुतिन, कॉन्सेप्ट फोटो
Iran US Tensions News In Hindi: मिडल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कमान संभाली है। क्रेमलिन की रिपोर्ट के अनुसार, पुतिन ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान को फोन कर देश में जारी अशांति पर गंभीर चर्चा की। लेकिन इस बातचीत का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि ईरान से बात करने के ठीक पहले पुतिन इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से भी बात की है।
माना जा रहा है कि रूस दोनों धुर विरोधियों के बीच सुलह करवाकर क्षेत्र में एक बड़े सैन्य टकराव को टालने की कोशिश कर रहा है। यह हस्तक्षेप तब हुआ है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले को फिलहाल टालने का फैसला किया है जिससे सर्वोच्च नेता खामेनेई को अस्थायी राहत मिली है।
ईरान के भीतर हालात बेकाबू हो चुके हैं। सुरक्षा पर अविश्वास जताते हुए न्यूजीलैंड ने तेहरान स्थित अपने दूतावास को अस्थायी रूप से बंद करने का बड़ा फैसला लिया है। न्यूजीलैंड के प्रवक्ता के अनुसार, उनके सभी कर्मचारी रातों-रात वाणिज्यिक उड़ानों से सुरक्षित निकल गए हैं और अब वहां का संचालन अंकारा (तुर्किये) से किया जाएगा। वहीं, भारत भी ईरान में फंसे अपने नागरिकों को सुरक्षित निकालने की योजना पर काम कर रहा है।
ईरान में भड़की हिंसा की यह कड़ी दिसंबर 2025 में गहराते आर्थिक संकट और राष्ट्रीय मुद्रा ‘रियाल’ के तेजी से गिरने के साथ शुरू हुई। महीने के अंत तक राजधानी तेहरान से उठी विरोध की चिंगारी अन्य शहरों तक फैल गई जिसके बाद सुरक्षाबलों ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस का सहारा लिया। जनवरी 2026 की शुरुआत होते-होते हालात और बिगड़ गए और प्रदर्शन देश के 31 में से 22 प्रांतों तक पहुंच गए।
इसके साथ ही मौतों के आंकड़े भी बेहद चिंताजनक रहे। 6 जनवरी तक जहां मृतकों की संख्या 36 बताई गई थी वहीं 13 जनवरी तक यह आंकड़ा बढ़कर 2,500 से अधिक हो गया। हालात की जानकारी बाहरी दुनिया तक न पहुंचे, इसके लिए सरकार ने पूरे देश में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी थीं।
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अंतरराष्ट्रीय मंच पर भिड़ंत ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में अमेरिका को जमकर लताड़ा है। ईरान के उप राजदूत गुलाम हुसैन दर्जी ने अमेरिका को ‘शर्मनाक ड्रामेबाज’ करार देते हुए आरोप लगाया कि वाशिंगटन खुद आग लगाकर अब ईरानी जनता का मित्र बनने का नाटक कर रहा है। ईरान का दावा है कि यह पूरी अशांति तेहरान की छवि खराब करने के लिए रचा गया एक ‘अंतरराष्ट्रीय प्रोपेगेंडा’ है। फिलहाल 16 जनवरी तक सड़कों पर भारी सैन्य तैनाती के कारण हलचल कम है लेकिन गिरफ्तारियों का सिलसिला और तनाव बरकरार है।