खतरा अभी टला नहीं! पुतिन ने नेतन्याहू को किया अचानक फोन, क्या बड़े हमले से पहले आई चेतावनी?

Putin Netanyahu Phone Talks: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने फोन पर बातचीत की।
The danger is not over yet! Putin suddenly called Netanyahu, was this a warning before a major attack?
पुतिन ने नेतन्याहू से की फोन पर बात, कॉन्सेप्ट फोटो
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Middle East Tensions News In Hindi: शुक्रवार को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच हुई फोन बातचीत ने वैश्विक कूटनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। क्रेमलिन की ओर से जारी बयान में बताया गया कि पुतिन ने ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव को शांत करने के लिए मध्यस्थ की भूमिका निभाने की पेशकश की है।

उन्होंने कहा कि रूस क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए राजनीतिक-कूटनीतिक प्रयासों को और मजबूत करना चाहता है तथा दोनों देशों के बीच संवाद को आगे बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

'राउंड 2' स्ट्राइक का डर

ईरान के भीतर हालात बेहद खराब हो चुके हैं। देश में चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शन अब अपने 19वें दिन में प्रवेश कर चुके हैं। आंकड़ों के अनुसार, ईरान के 187 शहरों में 617 से अधिक प्रदर्शन दर्ज किए गए हैं जिसमें अब तक 2,615 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और 18,470 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इसी बीच, इजरायल और अमेरिका के बीच सैन्य सहयोग ने तनाव को और बढ़ा दिया है। गौरतलब है कि जून 2025 में अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला किया था। हाल ही में नेतन्याहू ने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात कर 'राउंड 2' स्ट्राइक की संभावनाओं पर भी चर्चा की है।

दोस्ती से दुश्मनी तक का सफर

इतिहास के पन्नों को पलटें तो इजरायल और ईरान हमेशा से दुश्मन नहीं थे। 1950 और 1970 के दशक के बीच दोनों देशों के बीच व्यापारिक और कूटनीतिक संबंध काफी मजबूत थे। तुर्किये के बाद ईरान वह दूसरा मुस्लिम देश था जिसने इजरायल को मान्यता दी थी। इजरायल ने ईरान को खेती, तकनीक और सुरक्षा के क्षेत्र में काफी मदद दी थी। हालांकि, 1979 की इस्लामी क्रांति और शाह रजा पहलवी के शासन के पतन के बाद यह दोस्ती कट्टर दुश्मनी में बदल गई।

नेतन्याहू की उम्मीद

मौजूदा स्थिति पर टिप्पणी करते हुए नेतन्याहू ने 11 जनवरी को कहा था कि यदि ईरान में वर्तमान सरकार गिरती है, तो इजरायल और ईरान फिर से अच्छे साझेदार बन सकते हैं। उन्होंने ईरान की सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे लोगों को "बहादुर" बताया और इजरायल के समर्थन का आश्वासन दिया। अब पूरी दुनिया की नजरें पुतिन की इस मध्यस्थता की पेशकश और ईरान के आंतरिक हालातों पर टिकी हैं।

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