प्रधानमंत्री मोदी और बेंजामिन नेतन्याहू (सोर्स-सोशल मीडिया)
US Israel Military Operation On Iran: पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव के बीच एक बड़ी खबर आई है जिसने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऐतिहासिक इजराइल यात्रा के ठीक बाद ईरान पर भीषण हमला किया गया। इजराइली दूत ने अब उस गुप्त सैन्य रणनीति का खुलासा किया है जिसके तहत इस हमले का समय चुना गया था। इस सैन्य कार्रवाई के बाद अब पूरे क्षेत्र में युद्ध की आग और अधिक भड़क गई है जिससे शांति खतरे में है।
भारत में इजराइल के राजदूत रूवेन अजार ने एक इंटरव्यू में बताया कि ईरान पर हमला एक सैन्य अवसर था। यह मौका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 26 फरवरी को तेल अवीव से सफलतापूर्वक लौटने के बाद ही सामने आया था। राजदूत ने स्पष्ट किया कि जब पीएम मोदी वहां मौजूद थे तब ईरान पर हमले की कोई योजना तय नहीं थी।
पीएम मोदी 25 और 26 फरवरी को इजराइल की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर थे जहां कई अहम समझौते हुए। इजराइली दूत के अनुसार यात्रा के दौरान क्षेत्रीय विकास पर चर्चा हुई पर हमले जैसी जानकारी साझा नहीं की गई। मोदी के जाने के दो दिन बाद सुरक्षा कैबिनेट ने बैठक की और शनिवार 28 फरवरी को इस हमले की मंजूरी दी।
अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान के कई शहरों और राजधानी तेहरान पर ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत प्रहार किया। इस भीषण हमले में 1000 से अधिक लोग मारे गए जिनमें ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई और उनका परिवार शामिल है। मरने वालों में खामेनेई की पत्नी, बेटी, दामाद और पोती की भी पुष्टि हुई है जिससे ईरान पूरी तरह टूट चुका है।
ईरान ने अपने सर्वोच्च नेता की हत्या का बदला लेने की कसम खाई है और जवाबी कार्रवाई में मिसाइलें दागी हैं। ईरानी मिसाइलें अब दुबई, अबू धाबी, कतर और बहरीन जैसे खाड़ी के बड़े शहरों में गिर रही हैं जिससे दहशत फैली है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि ईरान के लिए अब बातचीत से युद्ध टालने का समय पूरी तरह से निकल चुका है।
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ईरान की असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने अब खामेनेई के बेटे मोजतबा होसेनी खामेनेई को देश का अगला सुप्रीम लीडर चुन लिया है। जंग के बीच फंसे 110 भारतीय छात्रों ने भी भारत सरकार से जल्द से जल्द सुरक्षित निकासी की गुहार लगाई है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते इस तनाव ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और वैश्विक शांति पर एक बड़ा संकट पैदा कर दिया है।