
इजरायल-अमेरिका-ईरान टेंशन, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Ayatollah Ali Khamenei Bunker: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिका के साथ संभावित सैन्य टकराव के बीच ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंडरग्राउंड होने की खबरें सामने आ रही हैं। 86 वर्षीय खामेनेई ने कथित तौर पर तेहरान में एक बेहद मजबूत और गहरे बंकर में शरण ली है।
यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब ईरान अपनी नतांज न्यूक्लियर फैसिलिटी के पास ज़ाग्रोस पहाड़ों के अंदर 80 से 100 मीटर की गहराई में नई और विशाल सुरंगें बना रहा है।
सैटेलाइट तस्वीरों और खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान पहाड़ों के अंदर ऐसी जगहें तैयार कर रहा है जहां यूरेनियम संवर्धन के लिए इस्तेमाल होने वाले सेंट्रीफ्यूज को सुरक्षित रखा जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी गहराई में बने ठिकानों को नष्ट करना किसी भी सामान्य मिसाइल या बम के लिए लगभग असंभव है।
इजरायल के पास वर्तमान में अमेरिका से मिला GBU-28 बंकर बस्टर बम है जो 6 मीटर कंक्रीट या 30 मीटर मिट्टी को भेद सकता है लेकिन यह 100 मीटर गहरे बंकरों के लिए नाकाफी है। इजरायल अब अधिक शक्तिशाली GBU-72 बम हासिल करना चाहता है लेकिन वह भी एक बार में 80 मीटर मोटी चट्टान को नहीं तोड़ सकता। इसके अलावा इजरायल की ‘जेरिको’ मिसाइलें भी इतनी गहराई तक घुसने के लिए नहीं बनी हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, केवल अमेरिका का GBU-57 ही ऐसा पारंपरिक हथियार है जो 60 मीटर से ज्यादा कंक्रीट को भेद सकता है। 30,000 पाउंड वजन वाला यह भारी बम इजरायल के पास नहीं है और न ही उसके विमान इसे ले जाने में सक्षम हैं।
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गहराई की इस चुनौती से निपटने के लिए इजरायल ‘ड्रिलिंग स्ट्रैटजी’ पर विचार कर रहा है जिसमें एक ही जगह पर लगातार कई बम गिराकर परतों को हटाया जाता है। इसके अलावा, अगर मुख्य बंकर को तोड़ना मुमकिन न हो, तो सुरंगों के मुहाने, हवा के रास्ते और बिजली आपूर्ति को निशाना बनाकर अंदर मौजूद लोगों और मशीनों को बेकार करने की रणनीति अपनाई जा सकती है।






