ईरान ने ‘दलाल’ पाकिस्तान को दिखाया बाहर का रास्ता, अमेरिका के 15 सूत्रीय प्रस्ताव को बताया ‘फर्जी’
Pakistan Mediation Iran US Conflict: ईरान ने अमेरिका के 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव को ‘अपमानजनक’ बताकर ठुकरा दिया है। साथ ही पाकिस्तान की मध्यस्थता को भी सिरे से खारिज कर दिया है।
- Written By: अमन उपाध्याय
ईरान ने अमेरिका के शांति प्रस्ताव को खारिज किया, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Iran Rejects US Peace Proposal: मिडिल ईस्ट में जारी महायुद्ध के 24वें दिन शांति की कोशिशों को उस समय बड़ा झटका लगा, जब ईरान ने अमेरिका द्वारा भेजे गए 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। तेहरान ने न केवल अमेरिकी शर्तों को ‘कचरे के डिब्बे’ में फेंक दिया है बल्कि मध्यस्थता की कोशिश कर रहे पाकिस्तान को भी कड़ा संदेश देते हुए उसकी भूमिका को पूरी तरह नकार दिया है।
पाकिस्तान की ‘दलाली’ पर ईरान का प्रहार
सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के लिए इस्लामाबाद को एक मध्यस्थ या ‘ब्रोकर’ के रूप में पेश किया था। हालांकि, ईरान ने इस पर बेहद सख्त रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि उसे पाकिस्तान पर अब भरोसा नहीं रहा और वह फिलहाल किसी भी तरह की मध्यस्थता स्वीकार नहीं करेगा। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि जब तक उनकी शर्तें पूरी नहीं होतीं, किसी भी ‘दलाल’ के जरिए बातचीत का सवाल ही पैदा नहीं होता।
क्या थीं अमेरिका की 15 घातक शर्तें?
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भेजे गए इस प्रस्ताव में ईरान के सामने बेहद कड़ी शर्तें रखी गई थीं। मुख्य शर्तों में शामिल था कि ईरान को भविष्य में कभी भी परमाणु हथियार विकसित न करने की लिखित प्रतिबद्धता देनी होगी और अपनी धरती पर यूरेनियम एनरिचमेंट पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाना होगा। इसके अलावा, नतांज, इस्फहान और फोर्डो जैसे प्रमुख परमाणु केंद्रों को पूरी तरह निष्क्रिय और नष्ट करने की मांग की गई थी।
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अमेरिका ने यह भी शर्त रखी थी कि ईरान को पूरे मिडिल ईस्ट में फैले अपने प्रॉक्सी संगठनों (जैसे हिजबुल्लाह और हमास) का साथ छोड़ना होगा और उन्हें दी जाने वाली हर तरह की वित्तीय व सैन्य मदद बंद करनी होगी। सामरिक रूप से महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए हमेशा खुला रखने और ईरानी मिसाइल प्रोग्राम की रेंज पर सख्त सीमाएं लागू करने का भी प्रस्ताव था। इसके बदले में अमेरिका ने ईरान पर लगे प्रतिबंध हटाने और नागरिक परमाणु ऊर्जा (जैसे बुशहर प्लांट) में सहयोग देने का वादा किया था।
ट्रंप का दावा और ईरान का पलटवार
इस कूटनीतिक रस्साकशी के बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि ईरान पर्दे के पीछे जंग खत्म करने की ‘भीख’ मांग रहा है और सबके सामने केवल दिखावा कर रहा है। ईरान ने इसे सिरे से नकारते हुए अमेरिकी प्रस्ताव को वास्तविकता से दूर और ‘अपमानजनक’ करार दिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह कोई समझौता नहीं बल्कि अमेरिका की अपनी ‘विश लिस्ट’ है।
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ईरान की अपनी 5 शर्तें
झुकने के बजाय ईरान ने अपनी 5 शर्तें सामने रख दी हैं। तेहरान की सबसे बड़ी मांग है कि अमेरिका और इजरायल द्वारा किए जा रहे सभी हमलों और नरसंहार को तुरंत रोका जाए और युद्ध में हुए नुकसान के लिए ईरान को भारी मुआवजा दिया जाए। साथ ही, ईरान अब होर्मुज जलडमरूमध्य पर पूरी तरह कानूनी अधिकार और उसके लिए अंतरराष्ट्रीय मान्यता चाहता है।
