18 घंटे में एक्शन के लिए तैयार! US ने मिडिल ईस्ट भेजी अपनी सबसे घातक फौज, क्या है ट्रंप का 'गेम' प्लान?

US Iran War: मध्य पूर्व में तनाव के बीच अमेरिका ने 2000 अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती का आदेश दिया है। राष्ट्रपति ट्रंप एक तरफ ईरान को शांति प्रस्ताव भेज रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सैन्य दबाव बढ़ा रहे हैं।
Ready for Action in 18 Hours! US Deploys Its Deadliest Force to the Middle East What Is Trump's 'Game Plan'?
अमेरिका के सैनिक, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Trump Sends 2000 Troops: मध्य पूर्व के रणक्षेत्र में तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। एक तरफ जहां दुनिया की निगाहें कूटनीतिक रास्तों पर टिकी हैं, वहीं अमेरिका ने अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाकर हलचल तेज कर दी है। पेंटागन ने अमेरिकी सेना की प्रतिष्ठित 82वीं एयरबोर्न डिविजन के लगभग 2,000 सैनिकों को तत्काल प्रभाव से मध्य पूर्व के लिए रवाना होने का आदेश दिया है।

चौंकाने वाली बात यह है कि यह आदेश ठीक उस समय आया है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ एक नई कूटनीतिक पहल और शांति प्रस्ताव पर विचार कर रहे हैं।

ट्रंप की रणनीति

रक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सैनिकों की यह नई खेप भेजने का उद्देश्य राष्ट्रपति ट्रंप को अतिरिक्त सैन्य विकल्प उपलब्ध कराना है। इसे ट्रंप की 'प्रेशर टैक्टिक्स' के रूप में देखा जा रहा है, जहां वे बातचीत की मेज पर अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए जमीन पर सैन्य शक्ति का प्रदर्शन कर रहे हैं। ये 2,000 सैनिक 'इमीडिएट रिस्पॉन्स फोर्स' का हिस्सा हैं जो महज 18 घंटे के भीतर दुनिया के किसी भी कोने में कार्रवाई के लिए तैयार रहते हैं।

कितनी बढ़ गई है सैनिकों की संख्या?

ताजा तैनाती के साथ ही युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक भेजे गए अतिरिक्त अमेरिकी जमीनी सैनिकों की कुल संख्या लगभग 7,000 पहुंच जाएगी। इस दल में 82वीं एयरबोर्न डिविजन के कमांडर मेजर जनरल ब्रैंडन आर. टेग्टमायर और दो विशेष बटालियन शामिल हैं। इससे पहले करीब 4,500 मरीन सैनिक पहले ही क्षेत्र के लिए रवाना हो चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तैनाती इस संघर्ष में एक बड़ी 'एस्केलेशन' यानी बढ़ोत्तरी का संकेत है।

ऑपरेशन 'एपिक फ्यूरी' और मुख्य निशाने

अमेरिका की यह पूरी तैयारी 'एपिक फ्यूरी' ऑपरेशन के तहत हो रही है जिसमें दुनिया भर के विभिन्न हिस्सों से लगभग 50,000 सैनिक जुड़े हुए हैं। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि इन पैराट्रूपर्स को ईरान की सीमा के पास सटीक रूप से कहां तैनात किया जाएगा, लेकिन सूत्रों का कहना है कि वे ईरान की सीधी पहुंच के भीतर होंगे।

इन सैनिकों का संभावित उपयोग खार्ग द्वीप पर कब्जा करने या उसे सुरक्षित करने के लिए किया जा सकता है, जो ईरान का प्रमुख तेल निर्यात केंद्र है। इसी महीने की शुरुआत में अमेरिकी विमानों ने ईरान के 90 से अधिक सैन्य ठिकानों पर बमबारी कर अपनी मंशा जाहिर कर दी थी।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बड़ी कार्रवाई की संभावना

अमेरिकी नौसेना की 31वीं और 11वीं एक्सपेडिशनरी यूनिट के हजारों मरीन सैनिक भी अप्रैल के मध्य तक इस क्षेत्र में पहुंच जाएंगे। इनका मुख्य कार्य रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलना हो सकता है, जिसे ईरान ने व्यावसायिक जहाजों के लिए लगभग बंद कर दिया है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए जीवनरेखा माना जाता है और भारत जैसे देशों के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

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