
ईरान प्रोटेस्ट मरियम राजवी (सोर्स-सोशल मीडिया)
Maryam Rajavi MEK Iran Protest Control: ईरान में खामेनेई शासन के खिलाफ भड़की विद्रोह की आग ने अब पूरे देश को अपनी चपेट में ले लिया है, जहां सेना और पुलिस की ताकत भी बेअसर साबित हो रही है। तेहरान, इस्फहान और शीराज जैसे प्रमुख शहरों में प्रदर्शनकारी निडर होकर सड़कों पर उतरे हैं और उग्र भीड़ द्वारा सरकारी प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया जा रहा है।
सरकार द्वारा कराए गए जवाबी प्रदर्शन भी जनता के गुस्से को शांत करने में नाकाम रहे हैं, जिससे सत्ता के गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है। जांच में इस विद्रोह के तार ईरान से हजारों मील दूर फ्रांस की राजधानी पेरिस से जुड़े होने के पुख्ता संकेत मिले हैं।
ईरान में जारी इस तांडव का असली नेतृत्व पेरिस में बैठकर ‘मैडम एम‘ के नाम से मशहूर मरियम रजावी कर रही हैं। रजावी नेशनल काउंसिल ऑफ रेजिस्टेंस ऑफ ईरान (NCRI) की अध्यक्ष हैं और उन्होंने पेरिस को ही इस पूरे विद्रोह का मुख्य कंट्रोल रूम बना रखा है। यहीं से ईरान के अलग-अलग शहरों में आंदोलन के लिए रणनीतियां बनाई जा रही हैं और प्रदर्शनकारियों को दिशा-निर्देश दिए जा रहे हैं।
मरियम रजावी ने 1993 से ही निर्वासित सरकार का नेतृत्व संभालते हुए ईरान में तख्तापलट की नींव बहुत साल पहले ही रख दी थी। उन्होंने ईरान के भीतर बिखरे हुए विपक्षी गुटों को एकजुट किया और विशेष रूप से अल्पसंख्यकों को संगठित कर खामेनेई सरकार के खिलाफ एक मजबूत मोर्चा तैयार किया। मरियम का लक्ष्य केवल प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि मौजूदा शासन को पूरी तरह उखाड़ फेंकना और अपने पति की मौत का बदला लेना है।
विद्रोह को धार देने के लिए मरियम ने मुजाहिदीन-ए खालक (MEK) नामक संगठन को सक्रिय किया है, जो इस समय प्रदर्शनों का सबसे बड़ा स्तंभ बना हुआ है। दावा किया जा रहा है कि पेरिस से ही इस आंदोलन के लिए गुप्त रूप से भारी फंड और हथियार भिजवाए गए हैं। अमेरिकी और इजरायली खुफिया एजेंसियों की मदद से मरियम ने ईरान के भीतर अपने नेटवर्क को इतना मजबूत कर लिया है कि सरकार के लिए उसे तोड़ना मुश्किल हो गया है।
मरियम रजावी का यह संघर्ष केवल राजनीतिक नहीं बल्कि व्यक्तिगत प्रतिशोध की भावना से भी जुड़ा हुआ है। बताया जाता है कि उनके पति मसूद रजावी, जो MEK के प्रमुख थे, 2003 में रहस्यमयी तरीके से लापता हो गए थे और उनकी हत्या का आरोप ईरानी सरकार पर लगा था। तभी से मरियम 1980 से चले आ रहे अपने निर्वासन का अंत करने और खामेनेई सत्ता को धूल चटाने के लिए सही मौके का इंतजार कर रही थीं।
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इस पूरे मिशन के पीछे अमेरिका और इजराइल जैसी वैश्विक शक्तियों का समर्थन भी मरियम रजावी को मिल रहा है, जो ईरान के शासन को कमजोर देखना चाहते हैं। अल्पसंख्यकों और असंतुष्टों की एकजुटता ने इस आंदोलन को एक जनक्रांति का रूप दे दिया है जिसे दबाना अब ईरानी सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बन गया है। पेरिस से संचालित हो रही यह ‘चिंगारी’ अब ईरान के कोने-कोने में विकराल आग बनकर शासन को भस्म करने की ओर बढ़ रही है।
Ans: ईरान में हो रहे प्रदर्शनों के पीछे मुख्य चेहरा मरियम रजावी का है, जो पेरिस से 'नेशनल काउंसिल ऑफ रेजिस्टेंस ऑफ ईरान' का नेतृत्व कर रही हैं।
Ans: मरियम रजावी को उनके नाम के शुरुआती अक्षर और उनके रहस्यमयी कूटनीतिक प्रभाव के कारण 'मैडम M' कहा जा रहा है।
Ans: MEK (मुजाहिदीन-ए खालक) मरियम रजावी का मुख्य विद्रोही संगठन है, जो ईरान के भीतर प्रदर्शनों के लिए फंड और रसद उपलब्ध करा रहा है।
Ans: हां, दावा किया जाता है कि उनके पति मसूद रजावी की हत्या ईरानी सरकार ने कराई थी, जिसका बदला लेने के लिए वह तख्तापलट की कोशिश कर रही हैं।
Ans: विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, मरियम रजावी को इस मिशन के लिए अमेरिका और इजराइल से कूटनीतिक और रणनीतिक मदद मिल रही है।






