ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Iran President Pezeshkian Warning US Nuclear Program: मध्य पूर्व में गहराते संकट के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और विशेष रूप से अमेरिका को कड़ा संदेश दिया है। राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि उनका देश युद्ध का समर्थक नहीं है और हमेशा से बातचीत के जरिए समाधान खोजने का पक्षधर रहा है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका यह सोचता है कि वह दबाव डालकर ईरान को अपनी मर्जी के आगे झुका लेगा तो यह उसकी बड़ी भूल होगी।
ईरानी राष्ट्रपति ने टेलीग्राम पर जारी एक आधिकारिक बयान में कहा कि ईरान कभी भी अस्थिरता नहीं चाहता और वह दूसरे देशों के साथ रचनात्मक सहयोग के लिए तैयार है। राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने जोर देकर कहा कि देश पर किसी भी विदेशी शक्ति की मर्जी थोपने या उसे आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करने की कोई भी कोशिश पूरी तरह नाकाम होगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरानी जनता ऐसी किसी भी नीति को स्वीकार नहीं करेगी जो उनकी संप्रभुता के खिलाफ हो।
क्षेत्र में स्कूलों और कॉलेजों पर हो रहे हमलों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए राष्ट्रपति ने इसे इंसानियत के खिलाफ बताया। उन्होंने सवाल उठाया कि अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय सिद्धांतों के दायरे में आम नागरिकों, बच्चों और अस्पतालों जैसे जरूरी केंद्रों को निशाना बनाना कहां तक जायज है?
इसी बीच, ईरान के विज्ञान मंत्री ने तेहरान में एयरोस्पेस रिसर्च इंस्टीट्यूट के दौरे के दौरान अमेरिका और इजरायल की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि ईरान एक ऐसे दुश्मन का सामना कर रहा है जो किसी भी कानून, नैतिकता या मानवीय व्यवस्था को नहीं मानता।
दूसरी ओर, वॉशिंगटन का रुख भी काफी कड़ा नजर आ रहा है। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिकी प्रतिनिधि माइक वाल्ट्ज ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका तब तक पीछे नहीं हटेगा जब तक ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम (Nuclear Program) पूरी तरह से बंद नहीं कर देता। वाल्ट्ज ने फॉक्स न्यूज पर बातचीत के दौरान तेहरान से की गई मांगों को दोहराते हुए कहा कि ईरान को अपना परमाणु कार्यक्रम रोकना ही होगा और यह गैर-परक्राम्य है।
परमाणु मुद्दे के अलावा, समुद्र में आवाजाही को लेकर भी तनाव चरम पर है। माइक वाल्ट्ज ने दावा किया कि जब तक तेहरान होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में पूरी तरह से स्वतंत्र नेविगेशन बहाल नहीं कर देता तब तक अमेरिका अपनी समुद्री नाकाबंदी जारी रखेगा।
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अमेरिका का मानना है कि ईरान को वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी मर्जी चलाने या जलमार्गों को बाधित करने का कोई हक नहीं है। वॉशिंगटन अब ईरान पर इस बात के लिए भारी दबाव बना रहा है कि वह सभी अंतरराष्ट्रीय वाटरवेज को तुरंत खोले। इन परस्पर विरोधी दावों और शर्तों के बीच, मध्य पूर्व में कूटनीतिक समाधान की राह और अधिक जटिल होती दिख रही है।