ईरान संकट पर अमेरिका का बड़ा खुलासा: चीन ने नहीं दी कोई सैन्य मदद, रुबियो ने बीजिंग से की समर्थन की अपील
US Assessment China: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि चीन ने ईरान को कोई सैन्य सहायता नहीं दी है। उन्होंने चीन से अपील की है कि वह होर्मुज में नौवहन की स्वतंत्रता के लिए समर्थन दें।
- Written By: अमन उपाध्याय
मार्को रुबियो- फोटो नवभारत
Iran Conflict US Assessment China: मीडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिका ने चीन की भूमिका को लेकर एक महत्वपूर्ण आकलन पेश किया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने हाउस एप्रोप्रियेशन्स सबकमेटी की सुनवाई के दौरान बताया है कि वर्तमान क्षेत्रीय संकट में चीन ने ईरान को सैन्य सहायता प्रदान नहीं की है। रुबियो के अनुसार, चीन ने ईरान के साथ अपने गहरे रणनीतिक संबंधों के बावजूद इस युद्ध में सीधे तौर पर शामिल होने से बचते हुए एक ‘सावधानीपूर्ण’ रवैया अपनाया है।
क्या है चीन का रुख?
मार्को रुबियो ने स्वीकार किया कि ईरान के पास चीन में बने कुछ पुराने सैन्य उपकरण जरूर हैं, जो दोनों देशों के लंबे समय से चले आ रहे संबंधों का हिस्सा हैं। हालांकि, उन्होंने सांसदों को आश्वस्त करते हुए कहा कि हालिया संघर्ष के दौरान ऐसी कोई गतिविधि नहीं देखी गई है जिससे युद्ध के मैदान की स्थिति या सैन्य संतुलन पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा हो। उनके मुताबिक, चीन ने अभी तक अमेरिकी अभियानों या उनकी काम करने की क्षमता में कोई बाधा नहीं डाली है।
अमेरिका ने की चीन से अपील
अमेरिका वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक ऐसे प्रस्ताव का समर्थन कर रहा है, जिसका उद्देश्य होर्मुज में नौवहन की स्वतंत्रता बहाल करना है। रुबियो ने चीन से अपील की कि वह इस प्रस्ताव का समर्थन करे या कम से कम वीटो का इस्तेमाल न करे। उन्होंने तर्क दिया कि चीन के पास इस मार्ग में स्थिरता बनाए रखने के मजबूत आर्थिक कारण हैं। चीन की निर्यात-आधारित अर्थव्यवस्था वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर काफी निर्भर है।
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यदि समुद्री मार्ग लंबे समय तक बाधित रहते हैं, तो ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण वैश्विक बाजार की क्रय शक्ति कम होगी, जिसका सीधा नकारात्मक असर चीन के निर्यात पर पड़ेगा। इस खतरे को रेखांकित करते हुए उन्होंने खुलासा किया कि हाल ही में चीन जा रहे एक जहाज को भी इस संकट के दौरान निशाना बनाया गया था।
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एशिया पर क्या पड़ेगा प्रभाव?
यह घटनाक्रम भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि चीन और भारत दोनों ही खाड़ी क्षेत्र से ऊर्जा संसाधनों (तेल और गैस) के बड़े आयातक हैं। रुबियो के आकलन के अनुसार, यदि होर्मुज में व्यवधान जारी रहता है, तो इसका असर न केवल कच्चे तेल की कीमतों और शिपिंग लागत पर पड़ेगा, बल्कि पूरी एशियाई सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है। वॉशिंगटन का यह आकलन दर्शाता है कि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक मुद्दों में से एक पर चीन फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में है।
