

US Blacklisted Oil Tanker Crosses Hormuz: मध्य पूर्व में जारी भारी तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका की सैन्य नाकाबंदी को बड़ी चुनौती दी है। अमेरिका द्वारा 'ब्लैकलिस्ट' किया गया ईरान का एक विशाल कच्चा तेल वाहक (VLCC) जहाज, अमेरिकी नौसेना की घेराबंदी को तोड़ते हुए सुरक्षित रूप से ईरानी तट पर पहुंच गया है। इस घटना ने न केवल क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है बल्कि अमेरिका के उस दावे पर भी सवालिया निशान लगा दिए हैं जिसमें उसने ईरान की समुद्री व्यापारिक गतिविधियों को पूरी तरह रोकने की बात कही थी।
मुंबई स्थित ईरान के महावाणिज्य दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर इस घटना की पुष्टि की है। दूतावास के अनुसार, यह सुपरटैंकर, जो 20 लाख बैरल कच्चा तेल ले जाने की क्षमता रखता है पूरी यात्रा के दौरान अपने ट्रैकिंग सिस्टम को ऑन रखकर अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरा। ईरानी अधिकारियों का दावा है कि जहाज ने बिना किसी लुका-छिपी के खुलेआम यात्रा की और अमेरिकी प्रतिबंधों व धमकियों को बेअसर साबित कर दिया।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सख्त समुद्री नाकाबंदी शुरू करने की घोषणा की है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) का दावा है कि उन्होंने ईरान से उत्पन्न होने वाले या उसके बंदरगाहों पर जाने वाले सभी जहाजों को रोकने के लिए पूर्ण घेराबंदी लागू कर दी है। अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार, ईरान की लगभग 90 प्रतिशत अर्थव्यवस्था समुद्री व्यापार पर निर्भर है। अमेरिका का दावा था कि महज 36 घंटों के भीतर उन्होंने ईरान के समुद्री आयात-निर्यात को पूरी तरह से ठप कर दिया है, लेकिन इस सुपरटैंकर की सफल वापसी ने इन दावों को चुनौती दी है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, केवल यह सुपरटैंकर ही नहीं बल्कि कुछ अन्य जहाजों ने भी इस दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य को पार किया है। समुद्री ट्रैकिंग फर्म 'केपलर' (Kpler) के आंकड़ों से पता चला है कि लाइबेरिया के झंडे वाला मालवाहक जहाज 'क्रिस्टियाना' (Christianna) और कोमोरोस के झंडे वाला टैंकर 'एल्पिस' भी नाकाबंदी लागू होने के कुछ घंटों के भीतर इस रणनीतिक मार्ग से गुजरे।
'क्रिस्टियाना' ईरानी बंदरगाह बंदर इमाम खुमैनी पर मक्का उतारकर लौट रहा था जबकि 'एल्पिस' 31,000 टन मेथनॉल लेकर बुशहर बंदरगाह से रवाना हुआ था।
युद्ध की शुरुआत के बाद से ही ईरान इस संकीर्ण जलमार्ग के जरिए अपना माल भेजने की कोशिश कर रहा है, जबकि वह 'अमित्र' देशों के समुद्री यातायात पर कड़ी नजर रख रहा है। इस घटनाक्रम ने वाशिंगटन को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है। जहां एक ओर अमेरिका बातचीत की मेज पर ईरान को लाने के लिए आर्थिक दबाव का सहारा ले रहा है वहीं ईरान अपनी सैन्य और रसद क्षमता का प्रदर्शन कर यह संदेश दे रहा है कि वह झुकने वाला नहीं है।