राफेल ग्रॉसी और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची, फोटो (सो.सोशल मीडिया)
Iran Nuclear Deal Geneva: ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर जारी वर्षों पुराने गतिरोध को खत्म करने की एक और कोशिश शुरू हो गई है। सोमवार को ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रॉसी के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। यह उच्च-स्तरीय मुलाकात मंगलवार से ओमान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच शुरू होने वाले दूसरे दौर की अप्रत्यक्ष वार्ता से ठीक पहले हुई है।
ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर अपने इरादे स्पष्ट करते हुए लिखा कि वे एक न्यायपूर्ण और समान समझौते को प्राप्त करने के लिए वास्तविक विचारों के साथ जिनेवा पहुंचे हैं। हालांकि, उन्होंने कड़े शब्दों में यह भी कहा कि धमकियों के आगे झुकना वार्ता का हिस्सा नहीं होगा। ईरान के उप विदेश मंत्री माजिद तख्त-रवांची ने संकेत दिया कि यदि अमेरिका ईमानदारी दिखाता है और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को हटाने का ठोस आश्वासन देता है तो तेहरान परमाणु मुद्दे पर समझौता करने के लिए तैयार है।
Joined by nuclear experts, I will meet @rafaelmgrossi on Mon for deep technical discussion. Also meeting @badralbusaidi ahead of diplomacy with U.S. on Tues. I am in Geneva with real ideas to achieve a fair and equitable deal.
What is not on the table: submission before threats — Seyed Abbas Araghchi (@araghchi) February 16, 2026
यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब क्षेत्र में सैन्य तनाव चरम पर है। पिछले साल भी दोनों देशों के बीच परमाणु वार्ता हुई थी, लेकिन इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमले और उसके बाद अमेरिका द्वारा ईरानी परमाणु ठिकानों पर की गई बमबारी के कारण वह प्रक्रिया बीच में ही टूट गई थी। वर्तमान में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर अधिकतम दबाव की नीति जारी रखी है।
ट्रंप ने हाल ही में दुनिया के सबसे बड़े विमानवाहक पोत, USS Gerald R. Ford, को मध्य पूर्व में तैनात करने के आदेश दिए हैं जिसे ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
IAEA प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने पहले ही चेतावनी दी है कि ईरान ने यूरेनियम का संवर्धन 60% शुद्धता तक कर लिया है, जो कि हथियारों के ग्रेड के स्तर से तकनीकी रूप से बहुत छोटा कदम दूर है।
ग्रॉसी के अनुसार, ईरान के पास मौजूद 60% संवर्धित यूरेनियम का भंडार इतना है कि यदि वह चाहे तो 10 परमाणु बम बना सकता है, हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि उसके पास वर्तमान में ऐसे हथियार हैं। ट्रंप प्रशासन का स्पष्ट रुख है कि किसी भी नए समझौते के तहत ईरान को यूरेनियम संवर्धन की अनुमति नहीं दी जा सकती जिसे तेहरान मानने को तैयार नहीं है।
यह भी पढ़ें:- यूक्रेन जंग में शहीद सैनिकों के परिवारों को किम जोंग उन का तोहफा, प्योंगयांग में बनी आलीशान ‘सइपियोल स्ट्रीट’
इस बीच, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने वाशिंगटन का दौरा कर राष्ट्रपति ट्रंप पर दबाव बनाया है कि किसी भी समझौते में न केवल परमाणु कार्यक्रम, बल्कि ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और हमास व हिजबुल्लाह जैसे Proxy Groups की फंडिंग रोकने की शर्तें भी शामिल होनी चाहिए।