ईरान पर हमले के लिए अमेरिका तैयार, लेकिन रास्ते में आ गए 3 देश; ‘प्रॉक्सी वॉर’ ने बिगाड़ा ट्रंप का गणित
US Iran War: अमेरिका ने ईरान की सरकार को अस्थिर करने के लिए अपने युद्धपोत 'यूएसएस अब्राहम लिंकन' को तैनात कर दिया है, लेकिन ईरान के तीन प्रमुख प्रॉक्सी संगठनों ने इसको संकट में डाल दिया है।
- Written By: अमन उपाध्याय
अमेरिका-ईरान तनाव, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
US Iran Conflict News In Hindi: ईरान की खामेनेई सरकार को अस्थिर करने के अपने लंबे प्रयासों के तहत अमेरिका ने मध्य पूर्व में भारी सैन्य जमावड़ा किया है। अमेरिका ने अपना ‘चलता-फिरता सैन्य अड्डा’ कहा जाने वाला यूएसएस अब्राहम लिंकन इस क्षेत्र में भेजा है लेकिन वह अभी तक फारस की खाड़ी में प्रवेश नहीं कर पाया है और अरब सागर में ओमान के पास ही रुका हुआ है। इसका मुख्य कारण ईरान के तीन प्रॉक्सी संगठनों हूती, हिजबुल्लाह और कताइब का सक्रिय होना बताया जा रहा है।
ईरान का ‘ट्रिपल शील्ड’
अमेरिकी रणनीतिकारों के लिए ईरान के ये तीन सहयोगी संगठन किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं हैं। ये तीनों अलग-अलग मोर्चों पर अमेरिका और उसके सहयोगियों पर दबाव बना रहे हैं। जानिए कैसे देंगे ये ईरान को सुरक्षा:
यमन (हूती)
राजधानी सना पर काबिज हूती विद्रोहियों ने धमकी दी है कि यदि युद्ध शुरू होता है तो वे लाल सागर में अमेरिकी जहाजों को निशाना बनाएंगे। इनके पास ईरान द्वारा निर्मित हथियार हैं जिनका उपयोग वे खाड़ी देशों के व्यापार को ठप करने के लिए कर सकते हैं।
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लेबनान (हिजबुल्लाह)
हिजबुल्लाह प्रमुख नईम कासिम ने स्पष्ट किया है कि ईरान पर हमले की स्थिति में वे तटस्थ नहीं रहेंगे। लेबनान में सक्रियता सीधे तौर पर इजराइल के लिए खतरा पैदा करेगी, जो इस युद्ध में अमेरिका का प्रमुख सहयोगी है।
इराक (कताइब)
इराक के प्रॉक्सी संगठन ‘कताइब’ ने भी ईरान को खुला समर्थन दिया है, जिसके पास लगभग 7000 लड़ाकू जवान हैं। इराक सरकार का रुख भी ईरान के पक्ष में होने के कारण अमेरिका के लिए इराक के रास्ते ईरान पर हमला करना कठिन हो गया है।
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ट्रंप का ‘डिप्लोमेटिक’ मोड़ और खुफिया रिपोर्ट
न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने एक रिपोर्ट सौंपी है जिसमें ईरान की सरकार को वर्तमान में कमजोर बताया गया है। इस बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि ईरान समझौता करने के लिए इच्छुक दिख रहा है और वे तेहरान को बातचीत का ‘एक मौका’ देना चाहते हैं। दूसरी ओर, ब्रिटेन ने अपने टाइफून लड़ाकू विमानों को फारस की खाड़ी में तैनात कर दिया है और ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई के लिए अपने रिवोल्यूशनरी गार्ड के जवानों को होर्मुज जलडमरूमध्य में तैनात किया है।
