होर्मुज को ‘आजाद’ करेंगे ट्रंप! चीन-जापान समेत दुनिया से मांगी सैन्य मदद; बोले- जिनके जहाज फंसे, वे भेजें सेना
Iran US War: ईरान-अमेरिका जंग के बीच ट्रंप ने होर्मुज स्ट्रेट को जल्द 'आज़ाद' करने का दावा किया है। उन्होंने चीन और जापान जैसे देशों से जहाजों की सुरक्षा के लिए युद्धपोत भेजने की अपील की है।
- Written By: अमन उपाध्याय
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Donald On Trump Strait of Hormuz: मध्य-पूर्व में जारी भीषण तनाव और ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा बयान जारी किया है। ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका जल्द ही दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य को ‘आजाद’ कर देगा और इसे अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए पूरी तरह सुरक्षित बनाएगा। उन्होंने उन सभी देशों से अपनी नौसेना के युद्धपोत भेजने का आग्रह किया है जिनके जहाजों की आवाजाही इस तनाव के कारण प्रभावित हुई है।
ईरान की सैन्य क्षमता पर ट्रंप का दावा
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने संदेश में दावा किया कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने ‘ईरान की 100% सैन्य क्षमता’ को पहले ही नष्ट कर दिया है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि पूरी तरह कमजोर होने के बावजूद ईरान अभी भी ड्रोन, समुद्री माइंस या कम दूरी की मिसाइलों के जरिए शिपिंग में रुकावट डालने की कोशिश कर सकता है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिकी सेना संभावित खतरों के जवाब में तट के पास मिलिट्री ऑपरेशन जारी रखेगी और जरूरत पड़ने पर ईरानी नावों या जहाजों को निशाना बनाया जाएगा।
चीन और जापान से अपील
ट्रंप ने विशेष रूप से चीन, फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया और यूके जैसे देशों से इस इलाके में अपनी सेना भेजने की अपील की है। उन्होंने कहा कि स्ट्रेट को ऐसे देश से खतरा नहीं रहना चाहिए जिसका नेतृत्व पूरी तरह खत्म हो चुका है। ट्रंप का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय मौजूदगी से यह सुनिश्चित होगा कि यह जलमार्ग ‘खुला, सुरक्षित और आजाद’ बना रहे।
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कांडला पोर्ट बना ‘संकटमोचन’
होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते खतरों का सीधा असर भारतीय शिपिंग पर भी पड़ा है। तनाव के कारण गुजरात का कांडला बंदरगाह भारत के लिए ‘संकटमोचन’ बनकर उभरा है जहां अगले 72 घंटों में 22 जहाजों के पहुंचने की उम्मीद है। इसके साथ ही, भारत सरकार अपने 28 जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए ईरान के साथ कूटनीतिक बातचीत कर रही है। गौरतलब है कि भारत में पहले से ही रसोई गैस (LPG) के संकट को लेकर चर्चाएं गर्म हैं जिसे देखते हुए यह समुद्री रास्ता भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
