ईरानी मिनी सबमरीन, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Iran Naval Power Strait Of Hormuz: ईरान और इजरायल के बीच जारी भीषण सैन्य संघर्ष और मध्य पूर्व (Middle East) में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अपनी समुद्री ताकत को और अधिक घातक बना लिया है। ईरानी नौसेना ने आधिकारिक तौर पर अपने बेड़े में दो नई ‘मिनी’ या मिजेट सबमरीन को शामिल करने की घोषणा की है।
इन पनडुब्बियों का उद्घाटन रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण Strait of Hormuz के मुहाने पर स्थित बंदर अब्बास बंदरगाह पर किया गया है। यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दुनिया का लगभग एक-तिहाई समुद्री तेल व्यापार इसी जलमार्ग से होकर गुजरता है।
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, ये नई पनडुब्बियां अत्याधुनिक ‘सोनार-इवेडिंग’ तकनीक से लैस हैं जो उन्हें दुश्मन के रडार और जासूसी उपकरणों से बचने में मदद करती हैं। इन पनडुब्बियों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ये पानी की सतह के नीचे से ही मिसाइल दागने की क्षमता रखती हैं। इसके अलावा, ये टॉरपीडो दागने और समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने में भी सक्षम हैं।
बेड़े में शामिल की गई पनडुब्बियों में से एक, ‘गदीर-955’ (Ghadir-955) है जिसे 18 महीने में तैयार किया गया है जबकि ‘गदीर-942’ को 10 महीनों के भीतर आधुनिक तकनीकों के साथ ओवरहाल किया गया है।
इन ‘मिजेट’ पनडुब्बियों का वजन 150 मीट्रिक टन से कम होता है और इन्हें विशेष रूप से कम गहराई वाले पानी जैसे कि अरब की खाड़ी में संचालन के लिए डिजाइन किया गया है। हालांकि इनमें चालक दल के नौ सदस्यों के रहने की स्थायी व्यवस्था नहीं होती लेकिन ये गुप्त और छोटे मिशनों के लिए बेजोड़ हैं।
ईरान की दो मिनी सबमरीन
एडमिरल मोजतबा मोहम्मदी के अनुसार, ये पनडुब्बियां ईरान के स्वदेशी रक्षा कार्यक्रम की सफलता का प्रमाण हैं। वर्तमान युद्ध की स्थिति में जहां दुनिया पहले से ही अब तक के सबसे बड़े तेल आपूर्ति व्यवधान (Oil Supply Disruption) का सामना कर रही है इन पनडुब्बियों की मौजूदगी ने वैश्विक बाजार में चिंता बढ़ा दी है।
ईरान द्वारा अपनी नौसैनिक शक्ति का प्रदर्शन ऐसे समय में किया गया है जब इजरायल की ओर से मिसाइल हमलों और तेल आपूर्ति में बाधा की खबरें लगातार आ रही हैं। इस युद्ध का असर केवल युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं है भारत में भी पैकेज्ड वाटर निर्माताओं और खाद्य आपूर्ति श्रृंखला पर इसका प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
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होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरान की बढ़ती सैन्य सक्रियता ने उर्वरकों की कीमतों में भी उछाल ला दिया है, जिससे पूरे एशिया में खाद्य सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया है। ईरान का दावा है कि वह 1992 से अपने स्वयं के टैंक, मिसाइल और लड़ाकू विमान विकसित कर आत्मनिर्भर बन रहा है, जिससे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में बड़ा बदलाव आ सकता है।