ईरान से युद्ध के बीच US की बड़ी जीत! दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम देश ने टेक दिए घुटने, क्या ऐसा क्या हुआ?

Indonesia US Defense Deal: एक ओर ईरान अमेरिका से सीधे युद्ध में उलझा है, वहीं दूसरी ओर इंडोनेशिया ने US के साथ एक ऐसा विवादित रक्षा समझौता किया है जिसे 'सरेंडर' माना जा रहा है।
Major US Victory Amidst War with Iran! The World's Largest Muslim Nation Bows Down What Is the Secret Deal?
ईरान- इंडोनेशिया के बीच रक्षा समझौता, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Indonesia US Defense Deal News In Hindi: मध्य-पूर्व में ईरान और अमेरिका के बीच जारी भीषण संघर्ष ने पूरी दुनिया को दो ध्रुवों में बांट दिया है। जहां एक तरफ ईरान अपनी पूरी सैन्य शक्ति के साथ अमेरिका के खिलाफ मोर्चा खोले हुए है, वहीं दूसरी तरफ आबादी के लिहाज से दुनिया के सबसे बड़े मुस्लिम देश, इंडोनेशिया के एक फैसले ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में खलबली मचा दी है।

रिपोर्टों के अनुसार, इंडोनेशिया ने अमेरिका के साथ एक ऐसा रक्षा समझौता किया है जिसे विशेषज्ञों द्वारा अमेरिका के सामने 'सरेंडर' के रूप में देखा जा रहा है।

बिना अनुमति उड़ेंगे अमेरिकी फाइटर जेट

इस नए रक्षा समझौते के सबसे विवादास्पद हिस्से के अनुसार, अब अमेरिकी फाइटर जेट बिना किसी पूर्व अनुमति के इंडोनेशियाई हवाई क्षेत्र (Airspace) में उड़ान भर सकेंगे और वहां लैंड कर सकेंगे। इस समझौते का प्रारूप इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री और अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के बीच हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में तैयार किया गया है। हालांकि इस डील के कई गुप्त पहलुओं को अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन जानकारों का कहना है कि यह समझौता अमेरिका को इंडोनेशियाई संसाधनों का अपनी सुविधानुसार इस्तेमाल करने की पूरी छूट देता है।

विदेश मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय आमने-सामने

हैरानी की बात यह है कि इंडोनेशिया के भीतर ही इस समझौते का तीखा विरोध शुरू हो गया है। इंडोनेशिया के विदेश मंत्रालय ने खुद अपनी ही सरकार के इस रक्षा सौदे को 'आत्मघाती' करार दिया है। विदेश मंत्रालय ने रक्षा मंत्रालय को पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि इस तरह के समझौते से क्षेत्रीय तनाव बढ़ सकता है और देश की संप्रभुता को खतरा पैदा हो सकता है। यह संभवतः पहली बार है जब किसी देश के दो सबसे महत्वपूर्ण मंत्रालय एक राष्ट्रीय सुरक्षा समझौते पर एक-दूसरे के विपरीत खड़े नजर आ रहे हैं।

प्रबोवो सरकार का रणनीतिक बदलाव

इंडोनेशिया की इस बदलती नीति के पीछे वहां की आंतरिक राजनीतिक उथल-पुथल को एक बड़ा कारण माना जा रहा है। अगस्त 2025 में सरकार के खिलाफ हुई बगावत के बाद, राष्ट्रपति प्रबोवो का झुकाव स्पष्ट रूप से अमेरिका की ओर बढ़ गया है। इंडोनेशिया ने हाल ही में गाजा को लेकर ट्रंप की 'बोर्ड ऑफ पीस' योजना का समर्थन किया और शांति सेना के रूप में 8 हजार सैनिकों को भेजने का भी ऐलान किया। इसके अलावा, फरवरी में अमेरिका के साथ हुई टैरिफ डील का भी इंडोनेशिया के 65 संगठनों ने कड़ा विरोध किया था, जिसे अमेरिका के सामने समर्पण की शुरुआत बताया गया था।

दक्षिण चीन सागर में नया समीकरण

अमेरिका के लिए इंडोनेशिया की भौगोलिक स्थिति सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है। दक्षिण चीन सागर और हिंद-प्रशांत महासागर के केंद्र में स्थित होने के कारण, इंडोनेशिया से आसियान देशों की निगरानी करना और चीन के बढ़ते वर्चस्व को चुनौती देना आसान हो जाता है।

एक समय में 'गुट निरपेक्ष आंदोलन' (NAM) के अगुआ रहे इंडोनेशिया का 2020 के बाद तेजी से अमेरिका के पाले में जाना वैश्विक शक्ति संतुलन को बदल सकता है। जकार्ता पोस्ट जैसे स्थानीय मीडिया संस्थानों ने भी राष्ट्रपति प्रबोवो पर आरोप लगाया है कि वे अमेरिकी राष्ट्रपति को खुश करने की होड़ में देश के हितों को दांव पर लगा रहे हैं।

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