चीन के एकाधिकार को बड़ी चुनौती! अमेरिका के 'पैक्स सिलिका' में शामिल होगा भारत, जानें क्यों झुका वाशिंगटन?

Pax Silica India Entry: भारत जल्द ही US के नेतृत्व वाले रणनीतिक गठबंधन पैक्स सिलिका का हिस्सा बनेगा। यह पहल सेमीकंडक्टर, AI और महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन से चीन के वर्चस्व को खत्म करने के लिए है।
A major challenge to China's dominance! India will join America's 'Pax Silica' initiative; find out why Washington relented?
पैक्स सिलिका में इंडिया की एंट्री, (एआई डिजाइन फोटो)
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India-US Strategic Ties: वैश्विक तकनीक और कूटनीति के क्षेत्र में भारत के बढ़ते वर्चस्व को स्वीकार करते हुए अमेरिका ने उसे 'पैक्स सिलिका' में शामिल करने का ऐलान किया है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के अनुसार, भारत को अगले महीने इस समूह में पूर्ण सदस्य के रूप में आमंत्रित किया जाएगा।

भारत और अमेरिका के रिश्तों में नई मजबूती

टैरिफ विवादों के कारण भारत और अमेरिका के संबंधों में आई हालिया कड़वाहट के बाद, अब एक सकारात्मक मोड़ आया है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने घोषणा की है कि वाशिंगटन के लिए भारत से महत्वपूर्ण कोई दूसरा देश नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सच्चे दोस्त असहमत हो सकते हैं, लेकिन वे अंततः अपने मतभेद सुलझा लेते हैं। इसी सकारात्मक पहल के तहत भारत को अब 'पैक्स सिलिका' गठबंधन का सदस्य बनाया जा रहा है।

क्या है 'पैक्स सिलिका'?

'पैक्स सिलिका' अमेरिका की अगुवाई में लोकतांत्रिक देशों का एक खास समूह है, जिसका मुख्य लक्ष्य उच्च-स्तरीय माइक्रोचिप्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और महत्वपूर्ण खनिजों के लिए एक सुरक्षित और विश्वसनीय सप्लाई चेन तैयार करना है। वर्तमान में इन क्षेत्रों में चीन का एकाधिकार है, जिसे चुनौती देने के लिए ही इस रणनीतिक समूह का गठन किया गया है। इसका उद्देश्य दबावयुक्त निर्भरता को कम करना और यह सुनिश्चित करना है कि सहयोगी देश आधुनिक तकनीक का स्वतंत्र रूप से विकास कर सकें।

कौन-कौन से देश हैं शामिल?

इस समूह में केवल वे देश शामिल हैं जो लोकतांत्रिक मूल्यों को साझा करते हैं और उन्नत तकनीक निर्माण में सक्षम हैं। वर्तमान में इसमें अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, नीदरलैंड, ब्रिटेन, इजरायल, संयुक्त अरब अमीरात और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं।

पहले अमेरिका ने भारत को इस सूची से बाहर रखा था, लेकिन तकनीकी क्षेत्र में भारत की बढ़ती शक्ति के चलते उसे अपना निर्णय बदलना पड़ा है। भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक लाभ पैक्स सिलिका में शामिल होना भारत के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है जिसमें-

ग्लोबल चिप हब: भारत को सेमीकंडक्टर 'फैब्स' और डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया जैसी दिग्गज कंपनियों से भारी निवेश और तकनीकी हस्तांतरण मिलने की उम्मीद है।

रक्षा और अंतरिक्ष में मजबूती: आधुनिक मिसाइल प्रणाली और अंतरिक्ष तकनीक सुरक्षित चिप्स और AI के बिना अधूरी है। इस गठबंधन का हिस्सा बनने से भारत की सैन्य सुरक्षा और अंतरिक्ष मिशनों को नई ऊंचाइयां मिलेंगी।

चीन पर निर्भरता कम करना: यह कदम भविष्य की तकनीकों के लिए चीन पर निर्भरता को पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।

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