
पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन (सोर्स-सोशल मीडिया)
Russia-India Plus framework for global south: मौजूदा अशांत अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के दौर में भारत और रूस के दशकों पुराने और मजबूत रिश्ते वैश्विक बदलाव को नई दिशा देने की क्षमता रखते हैं। बुधवार को जारी एक विशेष रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों का आपसी विश्वास और रणनीतिक साझेदारी वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच भारत और रूस स्थिरता के दो प्रमुख स्तंभों के रूप में उभर सकते हैं। यह साझेदारी न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा बल्कि अंतरराष्ट्रीय नियमों पर आधारित बहुध्रुवीय व्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगी।
दिसंबर 2025 में राष्ट्रपति पुतिन की सफल भारत यात्रा के बाद ‘रूस-भारत प्लस’ मॉडल को व्यवहार में लाने की आवश्यकता बढ़ गई है। यह ढांचा शुरुआत में दक्षिण और मध्य एशिया में लागू किया जा सकता है, जिसे बाद में अफ्रीका और ग्लोबल साउथ तक विस्तारित किया जाएगा। यह नवाचारी दृष्टिकोण दोनों शक्तियों को साझा हितों वाले क्षेत्रों में सामूहिक प्रभाव पैदा करने में सक्षम बनाएगा।
रणनीतिक मामलों के विश्लेषक अतुल अनेजा के अनुसार, भारत और रूस को आपसी विश्वास के साथ ‘2+1 फॉर्मूला’ पर काम करना चाहिए। इसके तहत भारत और रूस किसी तीसरे देश को विशेष रणनीतिक क्षेत्रों में अपने साथ जोड़कर क्षेत्रीय संतुलन बना सकते हैं। यह फॉर्मूला दक्षिण और मध्य एशिया में बाहरी शक्तियों के हस्तक्षेप को रोकने और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत प्रभावी साबित होगा।
भारत और रूस के रणनीतिक हित अफगानिस्तान में काफी हद तक मेल खाते हैं, जो मध्य और पश्चिम एशिया का प्रवेश द्वार है। दोनों देशों के विशेष संबंध क्षेत्रीय सहयोग की संभावनाओं को बढ़ाते हैं और किसी शत्रुतापूर्ण गैर-क्षेत्रीय शक्ति के प्रभाव को सीमित करते हैं। एक स्थिर अफगानिस्तान दोनों देशों की राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक गलियारों के सुचारू संचालन के लिए अनिवार्य है।
अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद बगराम एयरबेस का मुद्दा फिर से गर्मा गया है और क्षेत्रीय तनाव बढ़ रहा है। ट्रंप ने पिछले वर्ष चेतावनी दी थी कि अगर बगराम एयरबेस का नियंत्रण अमेरिका को नहीं मिला, तो इसके ‘बुरे परिणाम’ होंगे। इस संभावित खतरे ने भारत और रूस जैसी क्षेत्रीय शक्तियों को रणनीतिक रूप से अधिक सतर्क और एकजुट होने पर मजबूर किया है।
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भारत और रूस के भू-राजनीतिक हित मध्य एशिया के देशों में भी एक-दूसरे से मजबूती के साथ गहराई से जुड़े हुए हैं। इस संवेदनशील क्षेत्र में संयुक्त पहलों को विकसित करना अब एक विकल्प नहीं बल्कि दोनों देशों के लिए एक रणनीतिक आवश्यकता बन गई है। यह सहयोग ऊर्जा सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी अभियानों में दोनों देशों की क्षमताओं को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकता है।






