तनाव के बीच भारत-पाक का बड़ा कदम, एक-दूसरे को क्यों सौंपी परमाणु ठिकानों की लिस्ट? जानिए पूरी वजह
India Pakistan News: भारत और पाकिस्तान ने भारी तनाव के बीच 1 जनवरी को अपने परमाणु संस्थानों की सूची साझा की है। 1988 के समझौते के तहत किया गया यह लगातार 35वां वार्षिक आदान-प्रदान है।
- Written By: अमन उपाध्याय
भारत-पाकिस्तान परमाणु संस्थानों की सूची, फोटो (सो. एआई डिजाइन)
India Pakistan Nuclear Facilities List: भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्तों में जमी बर्फ के बावजूद कूटनीतिक प्रोटोकॉल का पालन करते हुए गुरुवार, 1 जनवरी को परमाणु ठिकानों की लिस्ट शेयर की गई। विदेश मंत्रालय ने एक प्रेस रिलीज के जरिए पुष्टि की है कि यह आदान-प्रदान ‘परमाणु प्रतिष्ठानों और संस्थानों पर हमलों के निषेध’ से संबंधित समझौते के तहत किया गया है।
35 सालों से जारी है यह सिलसिला दोनों देशों के बीच यह समझौता 31 दिसंबर 1988 को हुआ था और 27 जनवरी 1991 को इसे पूरी तरह लागू किया गया था।
कब हुआ था पहला आदान-प्रदान?
समझौते की शर्तों के अनुसार, भारत और पाकिस्तान प्रत्येक कैलेंडर वर्ष की 1 जनवरी को उन परमाणु सुविधाओं की जानकारी साझा करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य हैं जो इस संधि के दायरे में आती हैं। यह लगातार 35वां मौका है जब दोनों देशों ने एक-दूसरे को यह जानकारी दी है। बता दें कि इसका पहला आदान-प्रदान 1 जनवरी 1992 को हुई थी।
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हालांकि अभी दोनों देशों के बीच इस समय संबंध बेहद नाजुक दौर से गुजर रहे हैं। पिछले साल मई में दोनों सेनाओं के बीच चार दिनों का भीषण संघर्ष हुआ था। तनाव की शुरुआत तब हुई जब 22 अप्रैल को पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवादियों ने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हमला कर 26 निर्दोष लोगों की जान ले ली थी।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ और जवाबी कार्रवाई
पहलगाम हमले के जवाब में भारत ने पाकिस्तान और उसके अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में सक्रिय आतंकी ठिकानों को नष्ट करने के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर‘ शुरू किया था। इस ऑपरेशन के तहत 7 अक्टूबर को किए गए हमलों में पाकिस्तान के 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए थे। इसके बाद पाकिस्तान ने भी जवाबी हमला करने की कोशिश की जिसे भारत के एयर डिफेंस सिस्टम ने काफी हद तक नाकाम कर दिया। लंबी खींचतान के बाद 10 जून को दोनों देशों के बीच सीजफायर पर सहमति बनी लेकिन मनमुटाव अब भी बरकरार है।
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समझौते का महत्व
यह समझौता न केवल सूचना साझा करने का माध्यम है बल्कि यह दोनों देशों को एक-दूसरे के खिलाफ परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से रोकने के लिए एक मनोवैज्ञानिक और कानूनी बाधा के रूप में भी कार्य करता है। भीषण सैन्य संघर्ष और ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे घटनाक्रमों के बाद भी इस सूची का आदान-प्रदान यह दर्शाता है कि परमाणु सुरक्षा के मामले में दोनों पक्ष अंतरराष्ट्रीय और द्विपक्षीय संधियों का सम्मान करने का प्रयास कर रहे हैं।
