इजरायली सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफ्रिन (सोर्स- सोशल मीडिया)
Iran-Israel War: इजरायल और हिजबुल्लाह-ईरान के बीच जारी तनाव अब चरम पर पहुंच चुका है और युद्ध के 16वें दिन हालात और गंभीर होते नजर आ रहे हैं। इजरायली सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफ्रिन ने स्पष्ट किया है कि इजरायल अब किसी भी कीमत पर पीछे हटने वाला नहीं है और वह अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखेगा।
मीडिया से बातचीत में उन्होंने बताया कि करीब दस दिन पहले हिजबुल्लाह द्वारा फिर से गोलीबारी शुरू करने के फैसले के बाद ही मौजूदा टकराव तेज हो गया। उनके अनुसार, हिजबुल्लाह को अपने कदम के परिणामों का अंदाजा था, और अब इजरायली सेना उसकी हर कार्रवाई का कड़ा जवाब दे रही है।
डेफ्रिन ने ईरान और हिजबुल्लाह के संबंधों को समझाने के लिए ‘ऑक्टोपस’ का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि तेहरान इस ऑक्टोपस का सिर है, जबकि लेबनान में मौजूद हिजबुल्लाह उसका सबसे बड़ा हाथ है। उनके मुताबिक, जब ईरान पर दबाव या हमला होता है तो उसका सीधा असर हिजबुल्लाह की ताकत पर पड़ता है और वह कमजोर हो जाता है।
हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इजरायली सेना का लक्ष्य ईरान में सत्ता परिवर्तन कराना नहीं है। उनका कहना था कि इजरायल का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना है, जिसमें उसके बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम, परमाणु गतिविधियां और एयर डिफेंस सिस्टम शामिल हैं।
इजरायली सेना का दावा है कि मौजूदा समय में हिजबुल्लाह काफी दबाव और घबराहट में है क्योंकि उसे अपने प्रमुख सहयोगी और समर्थक ईरान से मिलने वाला समर्थन कम होता दिखाई दे रहा है। डेफ्रिन ने एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि लेबनान के एक ईसाई बहुल गांव से हिजबुल्लाह ने एंटी-टैंक मिसाइल दागने की कोशिश की थी।
इस दौरान एक स्थानीय धार्मिक नेता, जो हमले को रोकने की कोशिश कर रहे थे, इजरायली जवाबी कार्रवाई में मारे गए। इस घटना के बाद लेबनान के कई नागरिकों, खासकर ईसाई समुदाय में नाराजगी बढ़ी है और कुछ लोग इस तबाही के लिए हिजबुल्लाह को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
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उन्होंने यह भी कहा कि लेबनान के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और रक्षा प्रमुख की ओर से इजरायल के साथ सीधे संवाद की मांग उठने लगी है। डेफ्रिन के मुताबिक, इजरायल की आम ईरानी नागरिकों से कोई दुश्मनी नहीं है और वह भविष्य में उनके साथ शांतिपूर्ण संबंध चाहता है। उनका दावा था कि ईरान की बड़ी आबादी मौजूदा सरकार से असंतुष्ट है।