ईरान जंग में उतरे हूती, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Houthi Missile Attack Israel: मध्य पूर्व में जारी संघर्ष अब विनाशकारी मोड़ पर पहुंच गया है। 28 मार्च, 2026 को इजरायल और ईरान के बीच जारी भीषण जंग में अब यमन की भी आधिकारिक एंट्री हो गई है। इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने शनिवार की सुबह पुष्टि की कि यमन की ओर से इजरायल की सीमा के भीतर एक मिसाइल दागी गई है। यह हमला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि फरवरी में शुरू हुए इस युद्ध के बाद से हूती विद्रोहियों द्वारा किया गया यह अपनी तरह का पहला सीधा हमला है।
IDF के अनुसार, यमन से दागी गई इस मिसाइल को ट्रैक करने के तुरंत बाद इजरायल के एयर डिफेंस सिस्टम को सक्रिय कर दिया गया। हमले के खतरे को देखते हुए बीर शेबा और नेगेव के आसपास के रिहायशी इलाकों में युद्ध के सायरन बजाए गए जिससे स्थानीय निवासियों में हड़कंप मच गया। हालांकि, शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक, इस हमले में फिलहाल किसी के हताहत होने या किसी बड़े ढांचे को नुकसान पहुंचने की खबर नहीं मिली है।
यह हमला इजरायल के ‘ऑपरेशन रोरिंग लायन’ के शुरू होने के लगभग एक महीने बाद हुआ है। यमन की सशस्त्र सेनाओं ने शुक्रवार को ही चेतावनी जारी कर दी थी कि यदि अमेरिका और इजरायल ने ईरान तथा उसके समर्थित गुटों पर हमले बंद नहीं किए तो वे सीधे सैन्य हस्तक्षेप करेंगे। हूतियों के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सरी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उनकी सेनाएं ‘सीधे सैन्य हस्तक्षेप के लिए पूरी तरह तैयार हैं।’ हूतियों का आरोप है कि इजरायल इन हमलों के जरिए ‘ग्रेटर इजरायल’ बनाने के अपने एजेंडे पर काम कर रहा है।
हूतियों ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि लाल सागर का उपयोग ईरान या अन्य मुस्लिम देशों के खिलाफ हमले के लिए किया गया तो वे इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे और जंग में उतर जाएंगे। बता दें कि यमन के इन विद्रोहियों को ईरान का मजबूत समर्थन हासिल है। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब इस युद्ध में ईरान को भारी नुकसान उठाना पड़ा है जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई सहित कई बड़े नेताओं की मौत की खबरें सामने आई हैं।
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हूतियों के इस हमले और लाल सागर में उनकी बढ़ती सक्रियता ने वैश्विक व्यापार के लिए भी खतरे की घंटी बजा दी है। विशेषज्ञों को डर है कि यदि यह संघर्ष और फैला, तो महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्ग बाधित हो सकते हैं जिसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ेगा। फिलहाल, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें अमेरिका और इजरायल की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।