होर्मुज के 'डेथ ज़ोन' से सुरक्षित निकले दो भारतीय जहाज! इंडियन नेवी कर रही निगरानी

India Oil Ships: ईरान-इजरायल युद्ध के तनाव के बीच दो भारतीय तेल जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित पार कर चुके हैं। भारतीय नौसेना के युद्धपोत फारस की खाड़ी में सुरक्षा के लिए पूरी तरह मुस्तैद हैं।
Two Indian Ships Safely Exit Hormuz 'Death Zone'! Indian Navy Maintaining Surveillance.
होर्मुज के 'डेथ ज़ोन' से सुरक्षित निकले दो भारतीय जहाज (Image- Social Media)
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Strait of Hormuz India Oil Ships: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। पेट्रोलियम उत्पाद लेकर आ रहे दो और व्यापारी जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर चुके हैं और जल्द ही भारत पहुंचने की संभावना है। यह ऐसे समय में हो रहा है, जब ईरान से जुड़े तनाव के कारण इस अहम समुद्री मार्ग पर खतरा बना हुआ है और कई जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है।

इन जहाजों की सुरक्षा को देखते हुए भारतीय नौसेना पूरी तरह सतर्क है। फारस की खाड़ी के आसपास युद्धपोत तैनात किए गए हैं, जो जरूरत पड़ने पर इन जहाजों को सुरक्षा और सहायता प्रदान करने के लिए तैयार हैं।

नौसेना पूरी तरह सतर्क

सूत्रों के मुताबिक, आने वाले दिनों में और भी जहाज इसी मार्ग से भारत की ओर आ सकते हैं। ऐसे में नौसेना लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है। यह घटनाक्रम इस बात का संकेत है कि क्षेत्रीय तनाव के बावजूद भारत अपनी जरूरी ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए सक्रिय कदम उठा रहा है।

इन 5 देशों को छूट

इससे पहले मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत की खबर सामने आई थी। ईरान ने भारत समेत अपने “मित्र देशों” के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने का फैसला किया । इसका मतलब है कि भारतीय जहाज अब इस बेहद अहम समुद्री मार्ग से सुरक्षित रूप से गुजर सकेंगे।

यह निर्णय भारत के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश की एलपीजी, डीजल और पेट्रोल जैसी ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर आता है। ऐसे में इस रास्ते का खुला रहना सप्लाई चेन को सुचारु बनाए रखने में मदद करेगा।

मित्र देशों के जहाजों को गुजरने की अनुमति

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने गुरुवार को बताया कि भारत सहित मित्र देशों के जहाजों को इस मार्ग से गुजरने की अनुमति दी गई है। उनके इस बयान को क्षेत्र में तनाव के बीच सकारात्मक कदम के तौर पर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से वैश्विक तेल बाजार में भी कुछ हद तक स्थिरता आ सकती है, साथ ही भारत की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।

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