फ्रांसी के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे मायुंग, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
France South Korea Hormuz Strategy: मध्य-पूर्व में जारी युद्ध और Strait of Hormuz पर ईरान के नियंत्रण से उत्पन्न वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के बीच, फ्रांस और दक्षिण कोरिया ने इस संकट से निपटने के लिए एकजुटता दिखाई है। शुक्रवार को सियोल में एक शिखर सम्मेलन के दौरान, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे मायुंग ने इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को फिर से खोलने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति व्यक्त की।
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ युद्ध में अमेरिका और इजरायल का साथ न देने के लिए अपने सहयोगियों की कड़ी आलोचना की है। ट्रंप ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक बयानों के जरिए कहा है कि अमेरिका को इस जलमार्ग की उतनी जरूरत नहीं है जितनी उन देशों को है जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इस पर निर्भर हैं।
ट्रंप ने विशेष रूप से दक्षिण कोरिया, जापान और चीन का नाम लेते हुए कहा कि उन्हें खुद इस रास्ते को सुरक्षित करने के लिए आगे आना चाहिए।ट्रंप ने अपने बयान में दावा किया कि दक्षिण कोरिया में अमेरिका के 45,000 सैनिक तैनात हैं हालांकि आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वहां केवल 28,000 अमेरिकी सैनिक ही तैनात हैं।
2017 में पद संभालने के बाद मैक्रों पहली बार दक्षिण कोरिया के दौरे पर हैं उन्होंने स्पष्ट किया कि होर्मुज को खोलने के लिए कोई भी सैन्य अभियान चलाना ‘अवास्तविक’ है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संकट को कम करने के लिए एक स्पष्ट प्रक्रिया को परिभाषित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
वहीं, राष्ट्रपति ली ने पुष्टि की कि दोनों देश होर्मुज में सुरक्षित शिपिंग मार्ग सुनिश्चित करने के लिए अपने संकल्प पर अडिग हैं। दक्षिण कोरियाई अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि वे ईरान को किसी भी प्रकार का ‘ट्रांजिट शुल्क’ देने पर विचार नहीं कर रहे हैं।
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होर्मुज संकट के अलावा, दोनों नेताओं ने तकनीक और ऊर्जा के क्षेत्रों में भी सहयोग का विस्तार किया है। अधिकारियों ने परमाणु ईंधन आपूर्ति श्रृंखला, दक्षिण कोरिया में एक ऑफशोर विंड प्रोजेक्ट में संयुक्त निवेश और महत्वपूर्ण खनिजों पर सहयोग करने के समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। राष्ट्रपति ली ने कहा कि युद्ध ने दक्षिण कोरिया की जीवाश्म ईंधन आयात पर अत्यधिक निर्भरता को उजागर कर दिया है, इसलिए वे नवीकरणीय ऊर्जा और परमाणु ऊर्जा की ओर तेजी से बढ़ना चाहते हैं।