US Iran Peace: शांति की रट केवल छलावा! खुफिया रिपोर्ट का दावा- पीठ पीछे कुछ और ही खिचड़ी पका रहा पाकिस्तान
US Iran Peace: 100 बिलियन डॉलर के अपने कर्ज से बचने के लिए पाकिस्तान अमेरिका और ईरान में शांति करवाना चाहता है। जबकि इजराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ईरान पर हमले टलने से डोनाल्ड ट्रंप से खफा हैं।
- Written By: प्रिया सिंह
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, पाकिस्तान के प्रधानमन्त्री शाहबाज शरीफ और ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई (सोर्स-सोशल मीडिया)
Pakistan Mediates Update US Iran Peace: ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे भारी तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान लगातार शांति की कोशिश कर रहा है। इजरायल की एक रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान असल में अपने भारी आर्थिक संकट और 100 बिलियन डॉलर के कर्ज से बचना चाहता है। पाकिस्तान चाहता है कि जल्द से जल्द दोनों देशों में शांति समझौता हो जाए ताकि उसे ईरान से बड़ी आर्थिक मदद मिल सके।
इस शांति समझौते को लेकर पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री मोहसिन नकवी एक सप्ताह में दूसरी बार ईरान की राजधानी तेहरान पहुंचे हैं। पाकिस्तान और ईरान के बीच यह सहमति बनी है कि वह अमेरिका से अच्छी डील कराएगा। इसके बदले में ईरान पाकिस्तान को उसके कर्ज से उबरने के लिए भारी फंड देगा।
ट्रंप और नेतन्याहू में विवाद
एक तरफ शांति की कोशिशें हो रही हैं, तो दूसरी तरफ अमेरिका और इजरायल के बीच बड़ा मतभेद सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच फोन पर तीखी बहस हुई। ट्रंप फिलहाल ईरान पर दोबारा सैन्य हमला करने के बजाय शांति समझौते के पक्ष में ज्यादा नजर आ रहे हैं।
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रिपोर्ट के अनुसार इस पूरी बातचीत के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अमेरिकी राष्ट्रपति से बहुत ज्यादा नाराज थे। नेतन्याहू चाहते हैं कि ईरान की सैन्य क्षमता और बुनियादी ढांचे को पूरी तरह तबाह करने के लिए हमले जारी रहें। वाशिंगटन का शांति की ओर बढ़ता कदम इजरायल को अपने लिए एक बहुत बड़ा रणनीतिक खतरा लग रहा है।
कतर और यूएई की भूमिका
डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में बताया कि उन्होंने ईरान पर होने वाले बड़े सैन्य हमले को फिलहाल टाल दिया है। कतर और संयुक्त अरब अमीरात जैसे कई अरब देशों के विशेष अनुरोध के बाद अमेरिका ने यह बड़ा फैसला लिया है। इन अरब देशों का स्पष्ट मानना है कि युद्ध से पूरे मध्य-पूर्व क्षेत्र में भारी तबाही और अस्थिरता फैल सकती है।
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती दूरियों को कम करने के लिए कतर और पाकिस्तान ने मिलकर एक नया शांति मसौदा तैयार किया है। इस संशोधित शांति मसौदे में क्षेत्र के अन्य मध्यस्थ देशों के अहम सुझावों को भी पूरी तरह शामिल किया गया है। सभी देशों की यही कोशिश है कि इस बड़े सैन्य युद्ध को कूटनीतिक बातचीत के जरिए जल्द से जल्द रोक दिया जाए।
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पाकिस्तान का असली स्वार्थ
पाकिस्तान दुनिया के सामने भले ही शांतिदूत बनने का दिखावा कर रहा है, लेकिन उसका मुख्य मकसद सिर्फ अपना कर्ज चुकाना है। पाकिस्तान के ऊपर 100 बिलियन डॉलर से अधिक का विदेशी कर्ज है, जिससे उसकी पूरी अर्थव्यवस्था तेजी से डूब रही है। इसी आर्थिक दबाव के कारण पाकिस्तानी सरकार अमेरिका-ईरान के बीच जल्द से जल्द एक मजबूत समझौते के लिए भागदौड़ कर रही है।
पाकिस्तानी सेना के प्रमुख आसिम मुनीर के भी इस शांति वार्ता के सिलसिले में जल्द ही तेहरान पहुंचने की पूरी उम्मीद है। पाकिस्तान इससे पहले भी कई बार ईरान और अमेरिका के बीच समझौता कराने की असफल कोशिश कर चुका है। इस बार उसे पूरी उम्मीद है कि कतर के साथ मिलकर वह दोनों देशों को मनाने में पूरी तरह से कामयाब हो जाएगा।
