फ्रांस में बवाल! सड़क पर उतरे लाखों लोग, बड़े प्रदर्शन की वजह से एफिल टॉवर को करना पड़ा बंद

France protests News: फ्रांस में अगले साल के बजट में सार्वजनिक सेवाओं पर खर्च घटाने की सरकारी योजना के विरोध में लाखों लोग सड़कों पर उतर आए। कटौती नीतियों के खिलाफ हो रहे इस बड़े प्रदर्शन का असर...
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फ्रांस में सड़क पर उतरे लाखों लोग, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Eiffel Tower closed: फ्रांस में सरकार की नीतियों के खिलाफ जबरदस्त विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। गुरुवार से शुरू हुई ये हलचल धीरे-धीरे इतनी बढ़ गई कि राजधानी पेरिस का मशहूर एफिल टॉवर भी बंद करना पड़ा। हजारों की संख्या में लोग जिनमें मजदूर, सेवानिवृत्त नागरिक और छात्र शामिल हैं सड़कों पर उतरे और सरकार की बड़े पैमाने पर खर्च कटौती नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद की। प्रदर्शनकारियों ने राजधानी पेरिस के प्लास द’इटाली से मार्च किया और अमीर वर्ग पर अधिक टैक्स लगाने की मांग की।

रिपोर्ट के मुताबिक, पूरे देश में करीब 1 लाख 95 हजार लोगों ने प्रदर्शन किया, जिनमें से 24 हजार सिर्फ पेरिस में मौजूद थे। इन प्रदर्शनों का असर क्षेत्रीय रेल और स्वास्थ्य सेवाओं पर साफ दिखाई दिया। हालांकि पेरिस की मेट्रो सेवाएं लगभग सामान्य रहीं लेकिन ट्रेनें सीमित क्षमता के साथ चलीं। हड़ताल में कई शिक्षक और स्वास्थ्यकर्मी भी शामिल हुए। दरअसल, हजारों प्रदर्शनकारियों ने सरकार के अगले साल के बजट में प्रस्तावित बड़े पैमाने की कटौतियों का विरोध करते हुए पूरे फ्रांस में रैलियां निकालीं।

लोग क्या चाहते हैं?

ट्रेड यूनियनें राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और हाल ही में नियुक्त प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू पर लगातार दबाव बना रही हैं। लेकोर्नू ने अब तक न तो अपना बजट ब्लूप्रिंट पेश किया है और न ही मंत्रिमंडल की पूरी टीम तय की है। यूनियनों का साफ कहना है कि सरकार को सार्वजनिक सेवाओं पर खर्च बढ़ाना चाहिए, पेंशन की उम्र बढ़ाने का निर्णय वापस लेना चाहिए और अमीर वर्ग पर अधिक कर लगाना चाहिए। पिछले महीने देशभर के बड़े और छोटे शहरों में पांच लाख से ज्यादा लोगों ने सड़कों पर उतरकर विरोध जताया था। यूनियन के मुताबिक, उस आंदोलन में करीब 10 लाख हड़ताली कर्मचारी और प्रदर्शनकारी शामिल थे।

खर्च घटाने की तैयारी

फ्रांस में हो रहे विरोध प्रदर्शनों की वजह सरकार की बजट योजना है। दरअसल, सरकार अगले साल सार्वजनिक सेवाओं जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सुविधाओं पर खर्च घटाने की तैयारी कर रही है। यूनियन और आम लोग इसके खिलाफ खड़े हैं। उनकी मांग है कि आम जनता पर बोझ डालने के बजाय अमीरों पर ज्यादा टैक्स लगाया जाए। साथ ही प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि सरकार रिटायरमेंट की उम्र बढ़ाने का फैसला भी वापस ले। साफ संदेश यह है कि लोग कटौती नहीं, बल्कि सामाजिक सेवाओं पर ज्यादा निवेश चाहते हैं।

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