'सैन्य अभ्यास शुरू करे...', ग्रीनलैंड पर टकराव तेज, मैक्रों ने ट्रंप को दी खुली चुनौती; कहा- भेजेंगे अपनी सेना

Trump Macron: ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका और फ्रांस के बीच विवाद गहरा गया है। डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड को हासिल करने की जिद और भारी टैरिफ की धमकी के जवाब में मैक्रों ने वहां नाटो के सैन्य अभियान की...
'Start the military exercises...', conflict escalates over Greenland, Macron issues a direct challenge to Trump; says he will send his army.
डोनाल्ड ट्रम्प और इमैनुएल मैक्रों, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Emmanuel Macron NATO Exercise:  ग्रीनलैंड के मुद्दे पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच जुबानी जंग अब सैन्य चुनौती तक पहुंच गई है। दावोस में विश्व आर्थिक मंच के दौरान मैक्रों ने कड़ा रुख अपनाते हुए घोषणा की है कि यूरोप किसी भी धमकी के आगे नहीं झुकेगा। ट्रंप जहां ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए आर्थिक और कूटनीतिक दबाव बना रहे हैं वहीं फ्रांस ने अब इस क्षेत्र में नाटो के सैन्य अभ्यास की मांग कर दी है।

मैक्रों की ललकार और 'बोर्ड ऑफ पीस' का विरोध

फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने ट्रंप की उस रणनीति की कड़ी आलोचना की जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर यूरोप ने उन्हें ग्रीनलैंड पर कब्जा करने से रोका, तो वह भारी टैरिफ लगाएंगे। मैक्रों ने इन टैरिफ को बेवकूफी भरा और अनावश्यक आक्रामकता करार दिया। इतना ही नहीं, मैक्रों ने ट्रंप के प्रस्तावित 'बोर्ड ऑफ पीस' को संयुक्त राष्ट्र (UN) के विकल्प के रूप में मानने से भी इनकार कर दिया जिससे अमेरिकी राष्ट्रपति और अधिक भड़क गए हैं। मैक्रों का मानना है कि ट्रंप की यह जिद नाटो गठबंधन को खतरे में डाल सकती है।

अमेरिका ने उड़ाया फ्रांस का मजाक

फ्रांस द्वारा ग्रीनलैंड में सैन्य अभ्यास की मांग किए जाने पर अमेरिका ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। दावोस में अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने फ्रांस के राष्ट्रपति का मजाक उड़ाते हुए कहा कि मैक्रों को ग्रीनलैंड के बजाय अपने देश के खस्ताहाल बजट पर ध्यान देना चाहिए। बेसेंट ने तंज कसते हुए सलाह दी कि मैक्रों को अपनी जनता की आर्थिक समस्याओं और देश के बिगड़ते आर्थिक हालात की फिक्र करनी चाहिए न कि सैन्य अभ्यास की।

क्यों छिड़ा है विवाद?

विवाद की मुख्य जड़ डोनाल्ड ट्रंप की ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा बनाने की पुरानी इच्छा है, जिसे वह 2026 में फिर से जोर-शोर से उठा रहे हैं। ट्रंप इस इलाके को हासिल करने के लिए धमकियों का सहारा ले रहे हैं जबकि फ्रांस इसे यूरोपीय संप्रभुता और वैश्विक नियमों के खिलाफ मान रहा है। फिलहाल दोनों महाशक्तियां इस मुद्दे पर आमने-सामने हैं जिससे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में तनाव बढ़ गया है।

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