इमरान खान के खिलाफ ‘गवाह’ बनेंगे पूर्व ISI चीफ? वकील ने अटकलों पर लगाया पूर्णविराम, बताया क्या है सच
Imran Khan News In Hindi: पूर्व ISI प्रमुख फैज हमीद के वकील ने उन खबरों को पूरी तरह निराधार बताया है जिनमें दावा किया गया था कि वे इमरान खान के खिलाफ सरकारी गवाह बनेंगे।
- Written By: अमन उपाध्याय
इमरान खान और फैज हमीद, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Pakistan News In Hindi: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान और पूर्व आईएसआई (ISI) महानिदेशक फैज हमीद के बीच कथित संबंधों को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच एक महत्वपूर्ण बयान सामने आया है। फैज हमीद के वकील बैरिस्टर मियां अली अशफाक ने उन तमाम खबरों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें यह दावा किया जा रहा था कि हमीद इमरान खान के खिलाफ सरकारी गवाह बन सकते हैं।
वकील ने साफ शब्दों में कहा कि इस तरह की बातें केवल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चल रही अटकलों पर आधारित हैं और इनका वास्तविकता से कोई लेना-देना नहीं है।
कहा से उठी गवाही की चिंगारी?
दरअसल, यह चर्चा तब तेज हुई जब सीनेटर फैसल वावदा और कुछ अन्य संघीय मंत्रियों ने बार-बार यह दावा करना शुरू किया कि फैज हमीद जल्द ही इमरान खान के खिलाफ गवाही दे सकते हैं। इन बयानों के पीछे मुख्य उद्देश्य 9 मई 2023 की हिंसक घटनाओं के मामले में नया मोड़ लाना माना जा रहा था।
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सरकार में बैठे कुछ मंत्रियों का मानना है कि 9 मई की हिंसा इमरान खान और फैज हमीद के बीच एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी। हालांकि, वकील ने इन दावों को पूरी तरह निराधार बताया है और कहा है कि उनके मुवक्किल का ऐसा कोई विचार नहीं है।
14 साल की सजा और सरकारी दबाव
हाल ही में एक सैन्य अदालत द्वारा फैज हमीद को 14 साल की जेल की सजा सुनाई गई है। इस सजा के बाद रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ और सूचना मंत्री अत्ताउल्लाह तरार जैसे वरिष्ठ सरकारी नेताओं ने यह नैरेटिव सेट करना शुरू कर दिया कि हमीद अब अपनी सजा कम कराने या अन्य लाभ के लिए इमरान खान के खिलाफ गवाह बन सकते हैं। सरकार का आरोप है कि खान की गिरफ्तारी के बाद सैन्य ठिकानों पर हुए हमलों के पीछे इन दोनों की कथित सांठगांठ थी।
सेना और ISPR का रुख
हैरानी की बात यह है कि जहां एक ओर सरकार और उसके करीबी नेता लगातार इमरान खान और फैज हमीद की मिलीभगत की कहानी दोहरा रहे हैं, वहीं पाकिस्तान सेना की मीडिया शाखा ISPR ने अब तक अपनी किसी भी आधिकारिक ब्रीफिंग में इस कथित ‘सांठगांठ’ का सीधा जिक्र नहीं किया है।
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सूचना मंत्री ने भी इस विषय पर पूछे गए सवालों को सेना के पाले में डाल दिया है, जिससे सरकार और सत्ता प्रतिष्ठान के बीच सूचनाओं के तालमेल पर सवाल उठ रहे हैं। फिलहाल, फैज हमीद के वकील के इस बयान ने उन अटकलों पर विराम लगा दिया है जो इमरान खान की मुश्किलों को और बढ़ाने की ओर इशारा कर रही थीं।
