नेपाल में राजशाही बहाली की मांग तेज, फोटो (सो.सोशल मीडिया)
Former King Gyanendra Shah Return: नेपाल की राजधानी एक बार फिर ‘गणतंत्र बनाम राजतंत्र’ की बहस का केंद्र बन गई है। काठमांडू के त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उस समय अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया जब पूर्व राजा ज्ञानेंद्र शाह के स्वागत के लिए सैकड़ों की संख्या में समर्थक जमा हो गए। समर्थकों ने राजा को लाओ वापस जैसे नारे लगाए और राजशाही की बहाली की पुरजोर मांग की।
दिलचस्प बात यह है कि काठमांडू जिला प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से एयरपोर्ट के आसपास पांच से अधिक लोगों के इकट्ठा होने पर सख्त पाबंदी लगा रखी थी। इसके बावजूद, भारी सुरक्षा बल की तैनाती को दरकिनार करते हुए लोग सुबह से ही वहां पोस्टर और बैनर लेकर पहुंच गए। इस शक्ति प्रदर्शन का नेतृत्व राष्ट्रिय प्रजातंत्र पार्टी के वरिष्ठ नेता कमल थापा, नवराज सुबेदी और डॉक्टर दुर्गा प्रसाई जैसे बड़े चेहरों ने किया।
नेपाल में 5 मार्च को होने वाले आम चुनाव से पहले राजतंत्र समर्थकों ने अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। प्रेस वार्ता के दौरान डॉक्टर दुर्गा प्रसाई ने स्पष्ट किया कि वे देश में ‘हिंदू राजा’ की वापसी चाहते हैं और उनके एजेंडे को पूरा किए बिना चुनाव कराना संभव नहीं होगा। समर्थकों का मानना है कि 2008 में राजशाही खत्म होने के बाद से देश लगातार राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा है और राजा के बिना देश संकट में है।
नेपाल में 240 साल पुराना राजतंत्र साल 2008 में तब समाप्त हुआ था जब संविधान सभा ने देश को गणतंत्र घोषित कर दिया था। ज्ञानेंद्र शाह 4 जून 2001 को उस दुखद घटना के बाद राजा बने थे जब युवराज दीपेंद्र ने अपने पिता राजा बीरेंद्र और परिवार के अन्य सदस्यों की हत्या कर दी थी। ज्ञानेंद्र शाह का शासनकाल विवादों से भरा रहा 2005 में उन्होंने संसद भंग कर आपातकाल लगा दिया था जिसके बाद 2006 के जनआंदोलन ने उनकी सत्ता की नींव हिला दी।
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फिलहाल, पूर्व राजा ज्ञानेंद्र एक आम नागरिक की तरह ‘निर्मल निवास’ में रहते हैं और पर्यावरण संरक्षण जैसे कार्यों में रुचि रखते हैं। हालांकि, जिस तरह से पिछले कुछ वर्षों में उनके प्रति जनता का समर्थन बढ़ा है उसे देखते हुए राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि नेपाल में राजशाही की वापसी अब पूरी तरह असंभव नहीं लगती।