दुनिया पर मंडराया सबसे बड़ा ऊर्जा संकट! यूरोप के पास बचा सिर्फ 6 हफ्ते का हवाई ईंधन, IEA ने दी बड़ी चेतावनी
Europe Jet Fuel Shortage: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान संघर्ष के कारण दुनिया में ऊर्जा संकट गहरा गया है। आईईए के अनुसार, यूरोप के पास महज 6 हफ्ते का जेट ईंधन बचा है, जिसका असर भारत पर भी होगा।
- Written By: अमन उपाध्याय
सांकेतिक फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Europe Jet Fuel Shortage IEA Warning: पश्चिम एशिया में जारी भीषण तनाव और ईरान संघर्ष ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की कमर तोड़नी शुरू कर दी है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के प्रमुख फातिह बिरोल ने एक डरावनी चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यदि मौजूदा संघर्ष जल्द शांत नहीं हुआ, तो आने वाले कुछ ही हफ्तों में दुनिया को एक अभूतपूर्व ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ेगा। आईईए के अनुसार, यूरोप के पास अब अपनी उड़ानों को जारी रखने के लिए केवल 6 सप्ताह या उससे कुछ अधिक समय का ‘जेट ईंधन’ शेष बचा है।
विमानन क्षेत्र पर असर
इस संकट की मुख्य वजह हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का बंद होना या वहां आवाजाही बाधित होना है। यह मार्ग वैश्विक तेल और गैस शिपमेंट के लिए दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण लाइफलाइन माना जाता है। फातिह बिरोल ने ‘द एसोसिएटेड प्रेस’ को दिए एक साक्षात्कार में स्पष्ट रूप से चेतावनी दी कि यदि आपूर्ति मार्ग जल्द नहीं खुले तो एयरलाइंस को अपनी उड़ानें रद्द करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि जल्द ही हम ऐसी खबरें सुन सकते हैं कि शहर A से शहर B के बीच की उड़ानें जेट ईंधन की कमी के कारण रद्द कर दी गई हैं।
इतिहास का सबसे बड़ा ऊर्जा संकट
बिरोल ने वर्तमान स्थिति को ‘अब तक का सबसे बड़ा ऊर्जा संकट’ करार दिया है। उन्होंने एक प्रसिद्ध संगीत बैंड का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले ‘डायर स्ट्रेट्स’ नाम का एक ग्रुप था लेकिन आज जलडमरूमध्य (Strait) की स्थिति वास्तव में ‘डायर’ हो चुकी है। इस संकट का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर विनाशकारी प्रभाव पड़ेगा जिससे न केवल आर्थिक विकास की गति धीमी होगी, बल्कि दुनिया भर में मुद्रास्फीति (महंगाई) भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाएगी।
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भारत समेत एशिया पर ‘फ्रंटलाइन’ खतरा
आईईए प्रमुख के अनुसार, इस संकट की पहली मार एशियाई देशों पर पड़ेगी क्योंकि वे अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए मध्य पूर्व (Middle East) पर अत्यधिक निर्भर हैं। उन्होंने विशेष रूप से भारत, जापान, दक्षिण कोरिया, चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश का नाम लेते हुए कहा कि ये देश इस संकट की ‘फ्रंटलाइन’ यानी अग्रिम पंक्ति में खड़े हैं।
हालांकि इसका असर बाद में यूरोप और अमेरिका तक भी फैलेगा, लेकिन एशियाई अर्थव्यवस्थाओं के लिए यह स्थिति सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण होने वाली है।
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आम आदमी की जेब पर बढ़ेगा बोझ
ईंधन की इस किल्लत का सीधा असर कीमतों पर दिखाई देगा। बिरोल ने चेतावनी दी है कि आने वाले समय में उपभोक्ताओं को केवल हवाई टिकटों के लिए ही नहीं, बल्कि पेट्रोल, डीजल, गैस और बिजली के लिए भी बहुत अधिक कीमत चुकानी पड़ सकती है। वैश्विक बाजार अब पूरी तरह से हॉर्मुज जलडमरूमध्य के घटनाक्रमों पर टिके हुए हैं। यदि यह रास्ता खुलता है तो ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव कम हो सकता है अन्यथा दुनिया एक अंधेरे और महंगे दौर की ओर बढ़ रही है।
