चीन की ईरान को दोटूक: 'होर्मुज' का रास्ता खोलो वरना डूबेगी दुनिया की इकोनॉमी, तेल संकट पर मची खलबली

China Urges Iran Restraint: चीन ने ईरान से होर्मुज में जहाजों की आवाजाही सामान्य करने का आग्रह किया है। बीजिंग का मानना है कि इस मार्ग में बाधा वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा है।
China's Blunt Message to Iran: Open the 'Hormuz' Route, or the Global Economy Will Sink Turmoil Erupts Over Oil Crisis.
चीनी विदेश मंत्री वांग यी, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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China Urges Iran Restraint Hormuz Stability: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz), को लेकर चीन ने बड़ी कूटनीतिक पहल की है। चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से सीधी बात कर इस महत्वपूर्ण मार्ग पर आवागमन फिर से सुचारू करने की सिफारिश की है।

यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब इस संकरे समुद्री रास्ते में जारी अस्थिरता के कारण पूरी दुनिया में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता और डर का माहौल बन गया है।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराता खतरा

चीनी विदेश मंत्रालय द्वारा साझा किए गए विवरण के अनुसार, बीजिंग ने स्पष्ट रूप से चेतावनी दी है कि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी प्रकार की रुकावट न केवल क्षेत्रीय स्थिरता को बिगाड़ेगी, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी तहस-नहस कर सकती है। रणनीतिक रूप से यह मार्ग दुनिया के लिए 'लाइफलाइन' की तरह है क्योंकि वैश्विक तेल व्यापार का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। चीन का मानना है कि इस मार्ग की सुरक्षा केवल कुछ देशों का मुद्दा नहीं बल्कि पूरी दुनिया के आर्थिक हितों से जुड़ी है।

सैन्य कार्रवाई नहीं, कूटनीति ही विकल्प

बीजिंग ने तेहरान से संयम बरतने की अपील करते हुए अंतरराष्ट्रीय शिपिंग को बाधित न करने पर जोर दिया है। चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वर्तमान संकट का समाधान किसी सैन्य कार्रवाई में नहीं, बल्कि केवल संवाद और कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से ही निकाला जा सकता है। उनके अनुसार, मौजूदा स्थिति संघर्ष और शांति के बीच एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर है और अब शांति का रास्ता खुलता नजर आ रहा है। चीन का रुख संतुलित रहा है; उसने एक ओर ईरान की संप्रभुता और सुरक्षा के सम्मान की बात कही है तो दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय जहाजों के स्वतंत्र और सुरक्षित आवागमन की गारंटी की भी मांग की है।

चीन की अपनी ऊर्जा सुरक्षा दांव पर

इस कूटनीतिक सक्रियता के पीछे चीन के अपने गहरे आर्थिक हित भी छिपे हैं। चीन वर्तमान में दुनिया का सबसे बड़ा ऊर्जा आयातक है और उसकी तेल आपूर्ति का एक विशाल हिस्सा पश्चिम एशिया और विशेष रूप से होर्मुज के रास्ते से ही आता है। ऐसे में इस मार्ग पर कोई भी अवरोध सीधे तौर पर चीन की ऊर्जा सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है। इसी चिंता को देखते हुए वांग यी ने संघर्ष विराम बनाए रखने और बातचीत की प्रक्रिया को फिर से शुरू करने का समर्थन किया है।

ईरान का रुख और बढ़ती सैन्य हलचल

बातचीत के दौरान ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने उम्मीद जताई कि चीन शांति स्थापित करने और लड़ाई खत्म करने में अधिक सक्रिय भूमिका निभाएगा। अराघची ने स्पष्ट किया कि ईरान शांतिपूर्ण बातचीत के माध्यम से एक वास्तविक और स्थायी समाधान खोजने के लिए तैयार है। हालांकि, जमीन पर स्थिति अभी भी तनावपूर्ण है।

क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों और जहाजों की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों को उछाल दिया है। दुनिया भर के देश अब अपने जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त कदम उठा रहे हैं जो इस संकट की गंभीरता को दर्शाता है।

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