PAK-AFG जंग के बीच चीन की 'शटल डिप्लोमेसी', पड़ोसी देशों में शांति के लिए ड्रैगन ने संभाली कमान

Pakistan Afghanistan Tension: पाक-अफगान के बीच बढ़ते तनाव और सीमा पार हमलों को देखते हुए चीन ने मध्यस्थता शुरू की है। बीजिंग 'शटल डिप्लोमेसी' के जरिए दोनों देशों में विश्वास बहाल करने की कोशिश कर रहा।
China's 'shuttle diplomacy' amid the Pak-Afghan conflict, the Dragon taking command to promote peace in neighboring countries.
चीन के विदेश मंत्री, वांग यी, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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China Shuttle Diplomacy Pakistan Afghanistan: मध्य पूर्व में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच अब दक्षिण एशिया के दो पड़ोसी देशों पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच भी युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है। डूरंड लाइन के दोनों ओर से हो रहे हमलों और गोलाबारी ने क्षेत्र में भारी अस्थिरता पैदा कर दी है। इस संकट की घड़ी में अब चीन ने 'चौधरी' की भूमिका निभाते हुए दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की कमान संभाल ली है।

चीन की 'शटल डिप्लोमेसी' और शांति प्रयास

चीनी विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि वह पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच कड़वाहट को कम करने और शांति स्थापित करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है। इस उद्देश्य के लिए चीन ने एक विशेष दूत नियुक्त किया है, जो 'शटल डिप्लोमेसी' के जरिए काबुल और इस्लामाबाद के बीच संवाद का रास्ता खोलने की कोशिश कर रहा है। इस कूटनीति का मुख्य लक्ष्य दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच सीधा संवाद स्थापित करना और आपसी मतभेदों को सुलझाकर विश्वास बहाल करना है।

क्षेत्रीय स्थिरता के लिए चीन की प्रतिबद्धता

चीन का मानना है कि दक्षिण एशिया में शांति न केवल पाकिस्तान- अफगानिस्तान के लिए, बल्कि स्वयं चीन की सुरक्षा और उसके आर्थिक हितों के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। चीनी विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह त्रिपक्षीय संवाद सुनिश्चित करने की एक गंभीर कोशिश है ताकि क्षेत्र में स्थिरता बनी रहे। चीन ने स्पष्ट किया है कि वह ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर अपनी जिम्मेदारी समझते हुए क्षेत्रीय तनाव को कम करने के लिए प्रतिबद्ध है।

जमीनी स्तर पर सक्रियता

चीन ने केवल कूटनीतिक बयानबाजी तक ही खुद को सीमित नहीं रखा है, बल्कि जमीनी स्तर पर भी प्रयास तेज कर दिए हैं। पाकिस्तान और अफगानिस्तान में स्थित चीनी दूतावास निरंतर एक-दूसरे के संपर्क में हैं और दोनों देशों के अधिकारियों के साथ बातचीत कर रहे हैं। चीन का यह कदम ऐसे समय में आया है जब डूरंड लाइन पर तनाव अपने चरम पर है और दोनों देश एक-दूसरे पर ताबड़तोड़ हमले कर रहे हैं।

विवाद की गहरी जड़ें

गौरतलब है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा विवाद, आतंकवाद और सुरक्षा संबंधी मुद्दों को लेकर पुराना विवाद रहा है। हाल के दिनों में सीमा पार से हुई झड़पों और ड्रोन हमलों ने इस विवाद को और हवा दी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या चीन की यह 'शटल डिप्लोमेसी' इन दो पुराने विरोधियों के बीच दशकों पुराने मतभेदों को सुलझाने में सफल हो पाती है या नहीं।

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