ईरान की शामत! यूरोपीय यूनियन भी IRGC को घोषित करेगा ‘आतंकी संगठन’, 6,000 मौतों के बाद अमेरिका के साथ आया EU
EU Iran Tension: IRGC द्वारा प्रदर्शनकारियों पर की गई क्रूर कार्रवाई के बाद EU उसे आतंकी संगठन घोषित करने की तैयारी में है। इस कदम के लिए सभी 27 सदस्य देशों के बीच सहमति बनाने की प्रक्रिया जारी है।
- Written By: अमन उपाध्याय
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
EU Declare IRGC Terrorist: यूरोपीय यूनियन (EU) अब अमेरिका की राह पर चलते हुए ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) को आतंकी संगठनों की सूची में शामिल करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है।
EU की फॉरेन पॉलिसी चीफ काजा कल्लास ने गुरुवार को ब्रसेल्स में संकेत दिया कि हाल के हफ्तों में ईरानी शहरों में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ IRGC द्वारा की गई क्रूरता के बाद यह फैसला लिया जा रहा है। कल्लास ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि आप आतंकवादी जैसा व्यवहार करते हैं, तो आपके साथ वैसा ही व्यवहार किया जाना चाहिए।
6,000 मौतों के बाद बढ़ी नाराजगी
सूत्रों के अनुसार, ईरानी सुरक्षा बलों और IRGC की हिंसक कार्रवाई में अब तक करीब 6,000 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है।, इन रिपोर्टों के जवाब में EU अब IRGC को अल कायदा, हमास और ISIS जैसे संगठनों के बराबर रखने की योजना बना रहा है। कल्लास को उम्मीद है कि सदस्य देश जल्द ही इस पर एकमत हो जाएंगे जिससे ईरान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव और बढ़ जाएगा।
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फ्रांस और इटली का समर्थन
IRGC को आतंकी सूची में डालने के लिए EU के सभी 27 सदस्य देशों की सहमति अनिवार्य है। पहले फ्रांस और इटली जैसे देश इस कदम का विरोध कर रहे थे लेकिन अब स्थितियों में बदलाव आया है। बुधवार को फ्रांस ने अपना विरोध वापस ले लिया, जबकि इटली और स्पेन ने भी IRGC के खिलाफ इस कड़ी कार्रवाई का समर्थन किया है। हालांकि चर्चा अभी भी जारी है, लेकिन फ्रांस के रुख बदलने से इस प्रस्ताव के पारित होने की संभावना बढ़ गई है।
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अमेरिका का दबाव और ट्रंप की चेतावनी
उल्लेखनीय है कि अमेरिका ने साल 2019 में ही रिवोल्यूशनरी गार्ड को एक विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया था और वह लंबे समय से यूरोपीय संघ पर भी ऐसा करने के लिए दबाव डाल रहा था। इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने कहा कि ईरान के पास समय बहुत कम बचा है और उसे परमाणु हथियार न बनाने की शर्त पर समझौता कर लेना चाहिए वरना उसे जून 2025 में हुए हमले से भी बड़े सैन्य हमले का सामना करना पड़ सकता है।
