मेलोनी को आते देख घुटनों के बल बैठे रामा, जॉर्जिया बोलीं- एडी रुको; देखें VIDEO

अल्बानिया और इटली के बीच अच्छे संबंध हैं। दोनों देशों के बीच शरणार्थी नीतियों पर समझौते हैं, दोनों देशों में आप्रवासन, व्यापार और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर मजबूद रिश्ते है।
जॉर्जिया मेलोनी को देखते ही घुटनों पर बैठे अल्बानियाई पीएम, EPC समिट में दिखा भावनात्मक स्वागत
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के स्वागत में अल्बानिया के प्रधानमंत्री घुटनों पर बैठे
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तिराना: अल्बानिया की राजधानी तिराना में हुए यूरोपियन पॉलिटिकल कम्युनिटी समिट के दौरान एक स्वागत का क्षण चर्चा का केंद्र बन गया, जब इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के स्वागत में अल्बानिया के प्रधानमंत्री घुटनों पर बैठ गए। रेड कार्पेट पर हुए इस स्वागत का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसे कई लोग एक विशेष सांस्कृतिक सम्मान तो कुछ इसे अतिरंजित मान रहे हैं। हालांकि, इस दृश्य ने दोनों देशों के घनिष्ठ संबंधों और परस्पर सम्मान को एक प्रतीकात्मक रूप दे दिया, जो समिट की औपचारिकता से परे दिलों को जोड़ने वाला क्षण बन गया।

तिराना में आयोजित इस EPC सम्मेलन में 47 यूरोपीय देशों के नेता शामिल हुए, जहां यूक्रेन युद्ध, ऊर्जा संकट, जलवायु और प्रवासन जैसे अहम विषयों पर भी चर्चा हुई। इस मंच की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि यह यूरोपीय संघ के बाहर के देशों को भी साथ लाकर क्षेत्रीय सहयोग को मजबूती देने का काम कर रहा है। इस बार सम्मेलन में यूक्रेन के लिए समर्थन और बाल्कन देशों के यूरोपीय एकता पर खासा जोर दिया गया।

स्वागत का पल बना चर्चा का विषय EPC समिट के दौरान जब इटली की प्रधानमंत्री मेलोनी रेड कार्पेट पर पहुंचीं, तो अल्बानिया के प्रधानमंत्री ने उन्हें देखकर घुटनों पर बैठकर स्वागत किया। इस दौरान मेलोनी ने मुस्कुराते हुए कहा, "एदी, रुको!" यह दृश्य शिष्टाचार से परे एक दोस्ती और सांस्कृतिक सम्मान की भावना को व्यक्त करता है। वीडियो के सामने आने के बाद यह दृश्य सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और दुनियाभर में चर्चा का विषय बन गया।

Operation Sindoor के बाद पाकिस्तान की साजिशों को बेनकाब करेंगे भारतीय सांसद, 10 दिन में पूरी दुनिया को दिखेगी सच्चाई दोनों देशों के रिश्तों की झलक इटली और अल्बानिया के बीच हाल के वर्षों में गहरी मित्रती देखी गई है। खासतौर पर प्रवासन नीति के तहत दोनों देशों ने कई समझौते किए हैं, जिसमें शरणार्थियों को लेकर साझी जिम्मेदारियां तय की गई हैं। यह भावनात्मक स्वागत उन मजबूत रिश्तों की सार्वजनिक झलक के रूप में दिखा जो अब सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं है।

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