
डोनाल्ड ट्रंप वेनेजुएला पर हमले को देखते हुए (सोर्स-सोशल मीडिया)
Donald Trump Donroe Doctrine Western Hemisphere: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की नाटकीय गिरफ्तारी के बाद “डोनरो डॉक्ट्रिन” (Donroe Doctrine) का ऐलान कर वैश्विक राजनीति में खलबली मचा दी है। यह नई नीति 1823 के ऐतिहासिक “मोनरो डॉक्ट्रिन” का आधुनिक और अधिक आक्रामक संस्करण है, जिसके तहत अमेरिका पश्चिमी गोलार्ध को अपना विशेष कार्यक्षेत्र मानता है।
ट्रंप का यह सिद्धांत स्पष्ट करता है कि अमेरिका अपने पड़ोस में किसी भी विरोधी शक्ति, विशेषकर चीन और रूस के प्रभाव को बर्दाश्त नहीं करेगा और सैन्य शक्ति का उपयोग करने से भी पीछे नहीं हटेगा। इस कदम ने मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय संप्रभुता पर बहस छेड़ दी है, क्योंकि दुनिया अब एक ‘सुपरपावर’ के नए और खतरनाक रूप को देख रही है।
ऐतिहासिक रूप से जेम्स मोनरो ने यूरोपीय देशों को अमेरिकी क्षेत्रों में हस्तक्षेप के खिलाफ चेतावनी दी थी, लेकिन ट्रंप ने इसे बदलकर “डोनरो डॉक्ट्रिन” कर दिया है। ट्रंप का तर्क है कि वेनेजुएला के तेल संसाधनों पर रूस और चीन का प्रभाव अमेरिकी विदेश नीति के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन है। इस नीति के जरिए ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि वे पश्चिमी गोलार्ध में अमेरिकी वर्चस्व को फिर से स्थापित करने के लिए किसी भी देश की सरकार गिराने या सैन्य कार्रवाई करने को सही ठहराते हैं।
वेनेजुएला के बाद ट्रंप की नजर अब रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ग्रीनलैंड पर है, जो फिलहाल डेनमार्क के अधीन एक स्वायत्त क्षेत्र है। ट्रंप ग्रीनलैंड पर नियंत्रण पाकर आर्कटिक क्षेत्र में रूस की बढ़ती सैन्य शक्ति को चुनौती देना चाहते हैं, भले ही इसके लिए नाटो सहयोगी डेनमार्क से ही क्यों न टकराना पड़े। इसके अलावा, ट्रंप ने क्यूबा को लेकर भी खुली चेतावनी दी है कि वहां की सरकार जल्द ही गिरने वाली है, जो इस नई डॉक्ट्रिन के तहत अगले बड़े मिशन का संकेत है।
डोनाल्ड ट्रंप ने न केवल दुश्मनों बल्कि अपने पड़ोसियों को भी सख्त संदेश दिया है और कोलंबिया को वेनेजुएला जैसा अंजाम भुगतने की धमकी दी है। विदेश मंत्री मार्को रूबियो के अनुसार, अमेरिका पश्चिमी गोलार्ध को अपने प्रतिद्वंदियों के लिए ‘ऑपरेशन बेस’ नहीं बनने देगा। अमेरिका की इस नई राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति का उद्देश्य उन देशों को घुटने टेकने पर मजबूर करना है जो वाशिंगटन के हितों के खिलाफ जाते हैं, जिससे वैश्विक कूटनीति अब शक्ति प्रदर्शन के एक नए दौर में प्रवेश कर गई है।
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जब रूस ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देकर यूक्रेन पर हमला किया था, तब अमेरिका ने व्लादिमीर पुतिन को वैश्विक ‘विलेन’ करार दिया था। अब सवाल यह उठ रहा है कि अगर अमेरिका अपने गोलार्ध की सुरक्षा के नाम पर संप्रभु सरकारों को गिराता है, तो वह रूस से अलग कैसे है? आलोचकों का मानना है कि अमेरिका अब लोकतंत्र और मानवाधिकारों की आड़ छोड़कर खुले तौर पर ‘शक्ति ही सत्य है’ के सिद्धांत पर चल रहा है, जो आने वाले समय में दुनिया को और अधिक अस्थिर बना सकता है।
Ans: मोनरो डॉक्ट्रिन (1823) यूरोपीय उपनिवेशवाद को रोकने के लिए था, जबकि डोनरो डॉक्ट्रिन (2026) ट्रंप द्वारा अमेरिकी वर्चस्व स्थापित करने के लिए सैन्य ताकत के इस्तेमाल का आधुनिक सिद्धांत है।
Ans: ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से ग्रीनलैंड (आर्कटिक कंट्रोल के लिए), क्यूबा और कोलंबिया को अपनी नई नीति के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी है।
Ans: रूबियो का कहना है कि पश्चिमी गोलार्ध केवल अमेरिका का है और वे इसे चीन या रूस जैसे विरोधियों के लिए 'ऑपरेशन बेस' नहीं बनने देंगे।
Ans: हां, क्योंकि ग्रीनलैंड डेनमार्क का हिस्सा है जो नाटो का सदस्य है। अमेरिका द्वारा इस पर नियंत्रण की कोशिश नाटो के आंतरिक गठबंधन को खतरे में डाल सकती है।






