
सांकेतिक तस्वीर
China Attack Taiwan: अमेरिकी सेना की वेनेजुएला में कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद पूरी दुनिया जंग का माहौल बनता जा रहा है। इसी बीच अमेरिकी कार्रवाई ने चीन में एक नई बहस छेड़ दी है। कई चीनी यूजर्स इसे ताइवान को लेकर चीन की नीति के संदर्भ में “टेम्पलेट” बता रहे हैं। कुछ ने लिखा कि भविष्य में ताइवान को इसी तरह वापस लिया जा सकता है।
एक यूजर ने कहा कि अमेरिका अंतरराष्ट्रीय कानून की अनदेखी करता है, तो चीन को ऐसा करने में क्या रोक है। अन्य ने इसे ताइवान पर किसी कार्रवाई की योजना बनाने का ब्लूप्रिंट बताया। इन पोस्ट्स पर हजारों लाइक्स और शेयर मिल रहे हैं, जिससे यह चर्चा और बढ़ी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह मामला तेजी से ट्रेंड करने लगा और इसे लगभग 44 करोड़ बार देखा गया।
चीन के विदेश मंत्रालय ने वेनेजुएला पर अमेरिकी कार्रवाई की निंदा की और इसे संप्रभु देश पर बल प्रयोग बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना चीन की ताइवान नीति में तुरंत बदलाव नहीं लाएगी, लेकिन बीजिंग को क्षेत्रीय आक्रामकता बढ़ाने का बहाना मिल सकता है। पूर्व अमेरिकी राजनयिक रयान हास ने कहा कि चीन अंतरराष्ट्रीय कानून की अनदेखी में अमेरिका जैसी छूट चाहता है, जो स्थिति को और जटिल बना सकता है।
ताइवान विवाद का आधार ‘एक चीन सिद्धांत’ है। इसके अनुसार दुनिया में केवल एक चीन है और ताइवान उसका हिस्सा है। पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (PRC) पूरी चीन की वैध सरकार है। ऐतिहासिक रूप से, द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1945 में जापान से ताइवान चीन को लौटाया गया था। 1949 में चीन में गृहयुद्ध के बाद कम्युनिस्ट मुख्यभूमि पर PRC स्थापित हुए, जबकि राष्ट्रवादी ताइवान चले गए। चीन का दावा है कि PRC ने रिपब्लिक ऑफ चाइना की जगह ली और ताइवान पर संप्रभुता हासिल की।
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चीन ताइवान पर ‘एक देश, दो व्यवस्था’ के तहत आवश्यकता पड़ने पर बल प्रयोग की धमकी देता है। इसके विपरीत, ताइवान खुद को अलग संप्रभु इकाई मानता है। अमेरिका की हाल की कार्रवाई और मादुरो की गिरफ्तारी ने चीन में यह बहस तेज कर दी है कि ताइवान के प्रति कदम उठाने का समय कब और कैसे आ सकता है। इस तरह की घटनाएं क्षेत्रीय राजनीति और वैश्विक सुरक्षा को प्रभावित कर सकती हैं।






