चीन ने रूस को छोड़ा पीछे...निशाने पर अमेरिका, बनाई घातक न्यूक्लियर सबमरीन की फौज

China and Russia Sea Power: चीन ने रूस को परमाणु पनडुब्बियों की संख्या के मामले में पछाड़ा है। चीनी नेवी के पास 32 न्यूक्लियर सबमरीन हैं। इससे उसकी समुद्री ताकत, सेकंड स्ट्राइक क्षमता बढ़ रही।
China has left Russia behind... now America is the target, the Dragon has created an army of deadly nuclear submarines
चीन की परमाणु पनडुब्बी। इमेज-सोशल मीडिया
Published on
Updated on

China Sea Power: अब चीन दुनिया में परमाणु पनडुब्बियों का दूसरा सबसे बड़ा ऑपरेटर हो गया है। इस समय पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी के पास 32 सक्रिय परमाणु पनडुब्बियां हैं । इस मामले में चीन ने रूस को पछाड़ा है। रूस के पास 28 पनडुब्बियां हैं । अमेरिका के पास 71 परमाणु पनडुब्बियां हैं। दरअसल, यह बदलाव दुनिया भर की नौसैनिक ताकत में बड़ा मोड़ है। इंडो पैसिफिक समेत पूरी दुनिया में समुद्र के नीचे शक्ति संतुलन को नई दिशा दे रहा।

चीन की बढ़त उसकी तेज और बड़े पैमाने की नौसैनिक आधुनिकीकरण योजनाओं का रिजल्ट है। इसके विपरीत रूस आर्थिक दबाव, यूक्रेन युद्ध और रख- रखाव की कमी के कारण पनडुब्बियों को एक्टिव रखने में जूझ रहा।

चीन को पकड़ना मुश्किल

पूर्व अमेरिकी नौसेना अधिकारी क्रिस्टोफर कार्लसन ने चीन की अगली पीढ़ी की पनडुब्बी टाइप- 095 को लेकर आगाह किया है कि यह बेहद कम आवाज वाली होगी। उसे ट्रैक करना कठिन होगा। हेरिटेज फाउंडेशन के विशेषज्ञ ब्रेंट सैडलर ने कहा है कि चीनी पनडुब्बी तकनीक तेजी से बेहतर हो रही । इन्हें पकड़ना ज्यादा कठिन हो गया है।

अमेरिका की बढ़ी चिंता

वरिष्ठ अमेरिकी नौसेना अधिकारी ने माना है कि अमेरिका के शिपबिल्डिंग में उत्पादन की दिक्कतें हैं। यह चीन की तेज निर्माण क्षमता की अपेक्षा अमेरिका की कमजोरी दर्शाता है। रक्षा विश्लेषकों का कहना है कि इतिहास में पहली बार परमाणु पनडुब्बियों की संख्या में रूस से आगे चीन निकला है। इससे वह केवल क्षेत्रीय ताकत नहीं, बल्कि वैश्विक परमाणु नौसैनिक शक्ति बनता जा रहा।

ताइवान और दक्षिण चीन सागर के आसपास रणनीति मजबूत

चीन की बढ़ती पनडुब्बी ताकत से उसकी न्यूक्लियर सेकंड स्ट्राइक क्षमता मजबूत है। ताइवान और दक्षिण चीन सागर के आसपास ए2/ एडी रणनीति मजबूत होती है। अमेरिका और उसके सहयोगियों की समुद्री आवाजाही एवं रणनीति और जटिल होती है। आज समुद्र का क्षेत्र वह जगह बन रहा, जहां औद्योगिक क्षमता, कम आवाज वाली तकनीक और परमाणु प्रतिरोधक शक्ति मिलकर भविष्य की वैश्विक शक्ति निर्धारित करेंगी। दशकों की रणनीति का नतीजा चीन की यह उपलब्धि है। लगातार पनडुब्बियां बनाना, तकनीक को सुधारना शामिल हैं।

Navbharat Live: Hindi News
navbharatlive.com