अमेरिका को सीधी चुनौती! समंदर में BRICS का शक्ति प्रदर्शन, रूस-चीन और ईरान ने शुरू किया महाअभ्यास
BRICS Naval Exercise: अमेरिका से बढ़ते तनाव के बीच रूस, चीन और ईरान ने दक्षिण अफ्रीका के साथ मिलकर बड़ा नौसैनिक अभ्यास शुरू किया है। इसे पश्चिमी प्रभाव के खिलाफ रणनीतिक एकजुटता माना जा रहा है।
- Written By: अमन उपाध्याय
रूस-चीन और ईरान ने शुरू किया महाअभ्यास, (डिजाइन फोटो)
Will for Peace Exercise: अमेरिका के साथ बढ़ते कूटनीतिक और सैन्य तनाव के बीच रूस, चीन और ईरान ने दक्षिण अफ्रीका के तटों पर अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन शुरू कर दिया है।, इस अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास को पहले ‘Exercise MOSI III’ के नाम से जाना जाता था लेकिन इस बार इसे ‘Will for Peace’ (शांति के लिए संकल्प) का नया नाम दिया गया है।
चीन इस सैन्य अभ्यास की अगुवाई कर रहा है, जबकि दक्षिण अफ्रीका मेजबान की भूमिका निभा रहा है। हालांकि यह आधिकारिक तौर पर BRICS के नाम से नहीं हो रहा, लेकिन इसमें शामिल देशों की सदस्यता इसे ‘BRICS शक्ति प्रदर्शन’ के रूप में स्थापित कर रही है।
अमेरिका और पश्चिम को कड़ा संदेश
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस अभ्यास का राजनीतिक संदेश इसके सैन्य उद्देश्यों से कहीं अधिक गहरा है। वर्तमान में रूस, अमेरिका और नाटो के साथ सीधे टकराव की स्थिति में है। वहीं, ईरान न केवल पश्चिमी प्रतिबंधों का सामना कर रहा है, बल्कि वहां जारी आंतरिक विरोध प्रदर्शनों के बीच तख्तापलट की चर्चाओं ने भी तनाव बढ़ा दिया है।
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दूसरी ओर, चीन अमेरिका के साथ वैश्विक रणनीतिक प्रतिस्पर्धा में उलझा हुआ है। ऐसे समय में इन देशों का एक साथ आना वाशिंगटन और उसके सहयोगियों को एक स्पष्ट रणनीतिक चेतावनी है।
अभ्यास के मुख्य उद्देश्य और तकनीक
दक्षिण अफ्रीकी नेशनल डिफेंस फोर्स के अनुसार, इस अभ्यास का प्राथमिक मकसद समुद्री सुरक्षा को बढ़ाना और अहम शिपिंग रूट्स की रक्षा करना है। अभ्यास के दौरान अलग-अलग देशों के युद्धपोतों के बीच कम्युनिकेशन ड्रिल और सामूहिक तालमेल पर जोर दिया जा रहा है।
इसमें विशेष रूप से PASSEX (Passing Exercise) शामिल है जहां जहाज तय फॉर्मेशन में चलने और आपसी समन्वय का अभ्यास करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि खुले समुद्र में किसी भी देश के लिए अकेले काम करना मुश्किल होता है, इसलिए संकट के समय आपसी तालमेल बेहद अहम होता है।
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दक्षिण अफ्रीका के लिए रणनीतिक मौका
इस अभ्यास के पीछे एक व्यावहारिक वजह भी है। विशेषज्ञों के अनुसार, दक्षिण अफ्रीका की नौसेना वर्तमान में बहुत मजबूत स्थिति में नहीं है और उसकी लंबे समुद्री अभियानों की क्षमता सीमित है। ऐसे में रूस और चीन जैसी बड़ी नौसेनाओं के साथ अभ्यास करना दक्षिण अफ्रीका के लिए अपनी सैन्य क्षमता बढ़ाने और नई युद्ध प्रक्रियाओं को सीखने का एक बड़ा अवसर है।
