बांग्लादेश में हिंदुओं के त्योहारों पर छुट्टी रद्द, फोटो (सो. एआई डिजाइन)
Bangladesh News In Hindi: मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं के खिलाफ अत्याचार की खबरें लगातार सामने आ रही हैं। अब सरकार ने हिंदुओं के धार्मिक अधिकारों पर भी अंकुश लगाना शुरू कर दिया है।
साल 2026 की आधिकारिक छुट्टियों की जो लिस्ट जारी की गई है उसमें हिंदुओं के महत्वपूर्ण पर्वों सरस्वती पूजा, जन्माष्टमी, महालया और बुद्ध पूर्णिमा के लिए कोई छुट्टी नहीं दी गई है। यही नहीं, अंतर्राष्ट्रीय श्रम दिवस (मई दिवस) को भी इस सूची से बाहर रखा गया है।
सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, इन सभी विशेष दिनों पर देश के सभी स्कूल और शैक्षणिक संस्थान खुले रहेंगे। इस फैसले से हिंदू समुदाय में भारी आक्रोश है।
लोगों का कहना है कि एक तरफ रमजान और ईद-उल-फितर के लिए छुट्टियां दी गई हैं (हालांकि उनकी संख्या भी पहले से कम है), वहीं दूसरी तरफ अल्पसंख्यकों के त्योहारों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया गया है। आलोचकों के अनुसार, यह सीधे तौर पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कदम है।
‘भाषा दिवस’ पर विवाद इस सूची में सबसे चौंकाने वाला बदलाव ‘भाषा शहीद दिवस’ (21 फरवरी) की छुट्टी को हटाना है। 21 फरवरी 1952 को बंगाली भाषा की रक्षा के लिए हुए आंदोलन ने ही बांग्लादेश की आजादी की नींव रखी थी। आरोप लग रहे हैं कि यूनुस सरकार बांग्लादेश के इतिहास से भाषा आंदोलन और मुक्ति संग्राम के पहलुओं को मिटाने की कोशिश कर रही है।
सरकार के करीबी लोगों का तर्क है कि 2026 में 21 फरवरी को शनिवार है जो बांग्लादेश में पहले से ही साप्ताहिक अवकाश होता है इसलिए इसे अलग से शामिल नहीं किया गया। हालांकि, इस तर्क पर सवाल उठ रहे हैं क्योंकि 2025 में भी 21 फरवरी को साप्ताहिक छुट्टी (शुक्रवार) थी, फिर भी उसे आधिकारिक अधिसूचना में ‘भाषा दिवस’ के रूप में दर्ज किया गया था।
प्रसिद्ध शिक्षाविद् पवित्र सरकार ने इस फैसले पर कड़ा रुख अपनाते हुए इसे ‘मूर्खतापूर्ण’ करार दिया है। उन्होंने कहा कि जिस बंगाली भाषा को 21 फरवरी के कारण अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली उसके महत्व को कम करना समझ से परे है।
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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले डेढ़ साल में अंतरिम सरकार ने ऐसे कई फैसले लिए हैं जिनसे ‘बंगबंधु’ और लिबरेशन वॉर से जुड़ी स्मृतियों को गायब करने की कोशिश की गई है। यह विवाद ऐसे समय में गहरा रहा है जब बांग्लादेश में हिंदुओं पर लगातार हमले हो रहे हैं और उनकी सुरक्षा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंताएं जताई जा रही हैं।