US-Iran Tension: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने मध्य पूर्व भेजा दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा युद्धपोत
US Military Deployment: ट्रंप ने ईरान पर दबाव बनाने के लिए दुनिया के सबसे बड़े युद्धपोत 'यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड' को मध्य पूर्व भेजने का आदेश दिया है, जिससे युद्ध की आहट और तेज हो गई है।
- Written By: प्रिया सिंह
यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड (सोर्स-सोशल मीडिया)
Trump Middle East Military Strategy: अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव अब एक बहुत ही खतरनाक और नाजुक मोड़ पर पहुंच गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर दबाव बनाने के लिए एक बड़ा सैन्य फैसला लिया है। ट्रम्प ने मध्य पूर्व सैन्य रणनीति के तहत दुनिया के सबसे बड़े विमानवाहक पोत को वहां भेजा जा रहा है। इस सैन्य हलचल से पूरे पश्चिम एशिया में युद्ध की संभावनाएं पहले से और भी ज्यादा बढ़ गई हैं।
ट्रंप का बड़ा सैन्य फैसला
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘यूएसएस गेराल्ड आर. फोर्ड’ को कैरेबियन सागर से हटाकर तुरंत मिडिल ईस्ट भेजने का आदेश दिया है। यह दुनिया का सबसे बड़ा विमानवाहक पोत है जो अब ईरान की समुद्री सीमाओं के करीब अपनी मौजूदगी दर्ज कराएगा। प्रशासन का यह कदम ईरान के खिलाफ किसी संभावित सैन्य कार्रवाई का बहुत स्पष्ट संकेत माना जा रहा है।
यह युद्धपोत पहले वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के लिए कैरेबियन सागर के इलाके में तैनात किया गया था। लेकिन ट्रंप ने अपनी सुरक्षा रणनीति में अचानक बदलाव करते हुए इसे पश्चिम एशिया की तरफ पूरी तरह मोड़ दिया है। यह फैसला ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर वैश्विक दबाव को और भी ज्यादा बढ़ाने के लिए लिया गया है।
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मध्य पूर्व में बढ़ती सैन्य ताकत
मिडिल ईस्ट के इस अशांत इलाके में अमेरिका का ‘यूएसएस अब्राहम लिंकन’ विमानवाहक पोत पहले से ही तैनात होकर निगरानी कर रहा है। इसके साथ ही तीन मिसाइल वाले विध्वंसक जहाज यानी डिस्ट्रॉयर भी दो हफ्ते पहले ही वहां अपनी स्थिति मजबूत कर चुके हैं। अब दो बड़े युद्धपोतों की मौजूदगी से इस क्षेत्र में अमेरिका की मारक सैन्य शक्ति काफी बढ़ गई है।
सैन्य सूत्रों के अनुसार अब मध्य पूर्व में अमेरिका के दो सबसे शक्तिशाली नौसैनिक बेड़े एक साथ मौजूद रहेंगे जो किसी भी स्थिति से निपट सकते हैं। द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट ने सबसे पहले ट्रंप के इस बड़े और रणनीतिक फैसले की जानकारी पूरी दुनिया को दी थी। इससे यह साफ है कि ट्रंप प्रशासन ईरान के मामले में अब और ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।
रणनीति में बड़ा बदलाव
ट्रंप का यह नया कदम उनकी उस पुरानी घोषित सुरक्षा रणनीति से बिल्कुल अलग है जिसमें उन्होंने पश्चिमी गोलार्ध पर ध्यान देने की बात कही थी। इस हफ्ते की शुरुआत में उन्होंने खुद एक सोशल मीडिया चर्चा में मध्य पूर्व में अतिरिक्त युद्धपोत भेजने की अपनी मंशा जाहिर की थी। व्हाइट हाउस ने फिलहाल इस पूरे संवेदनशील मामले पर आधिकारिक रूप से चुप्पी साधी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप अब ईरान को चारों तरफ से घेरकर उसे बातचीत की मेज पर लाने या सैन्य रूप से कमजोर करना चाहते हैं। यूएसएस फोर्ड की अचानक तैनाती ने मध्य पूर्व के सैन्य संतुलन को पूरी तरह से अमेरिकी सेना के पक्ष में झुका दिया है। ईरान के परमाणु ठिकानों के पास इतनी बड़ी सैन्य मौजूदगी एक कड़ी चेतावनी के समान है।
सुरक्षा और कूटनीति पर असर
ईरान के साथ बढ़ते इस तनाव का असर आगामी वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी पड़ने की पूरी आशंका जताई जा रही है। अगर स्थिति और बिगड़ती है तो इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सैन्य संघर्ष शुरू होने का खतरा और भी गहरा हो सकता है। अमेरिका के इस कड़े रुख ने मित्र देशों और विरोधियों दोनों को ही कड़ा संदेश जारी किया है।
भविष्य में इस सैन्य तैनाती के परिणाम क्या होंगे यह आने वाले कुछ हफ्तों की राजनीतिक गतिविधियों और ईरान के जवाब पर निर्भर करेगा। फिलहाल ट्रंप प्रशासन अपनी इस आक्रामक नीति के जरिए ईरान को कड़ा सबक सिखाने की पूरी तैयारी में जुटा हुआ नजर आ रहा है। दुनिया भर की नजरें अब मध्य पूर्व के उन समुद्री इलाकों पर टिकी हुई हैं।
