
बांग्लादेश का अंतरराष्ट्रीय अपराध ट्रिब्यूनल, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Bangladesh News Hindi बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के पतन के दौरान हुए हिंसक आंदोलन से जुड़े एक बेहद संवेदनशील और जघन्य मामले में अंतरराष्ट्रीय अपराध ट्रिब्यूनल-2 ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।
गुरुवार, 5 फरवरी 2026 को अदालत ने पूर्व सांसद मुहम्मद सैफुल इस्लाम और दो पूर्व अतिरिक्त पुलिस अधीक्षकों (ASP) समेत कुल छह दोषियों को मौत की सजा सुनाई। यह मामला जुलाई-अगस्त 2024 के विद्रोह के दौरान आशुलिया में मानवता के खिलाफ किए गए अपराधों से संबंधित है।
यह फैसला 5 अगस्त 2024 को हुई उस भयावह घटना पर आधारित है जिसने पूरे बांग्लादेश को झकझोर कर रख दिया था। मामले के अनुसार, ढाका के आशुलिया क्षेत्र में पुलिस ने छह प्रदर्शनकारी युवकों को गोली मार दी थी। इसके बाद, क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए पुलिसकर्मियों ने उनके शवों को एक पुलिस वैन पर लाद दिया।
इन शवों को सड़क पर मिले पुराने बैनरों और गंदे कपड़ों से ढककर आग लगा दी गई थी। इस पूरी घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था जिसमें पुलिसकर्मी वैन पर शव लादते और उन्हें जलाते हुए साफ नजर आ रहे थे। जांच में यह चौंकाने वाला और दर्दनाक तथ्य सामने आया कि एक पीड़ित उस वक्त जिंदा था जब उसे आग के हवाले किया गया जिसके कारण उसकी तड़पकर मौत हो गई।
ट्रिब्यूनल-2 की तीन सदस्यीय बेंच, जिसकी अध्यक्षता जस्टिस नजरुल इस्लाम चौधरी कर रहे थे, ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर छह आरोपियों को दोषी करार दिया। मौत की सजा पाने वालों में पूर्व सांसद सैफुल इस्लाम, एएफएम सैयद, अब्दुल मालेक, विश्वजीत शाहा, मुकुल चोकदार और रॉनी भुइयां के नाम शामिल हैं। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि इन लोगों ने निहत्थे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जो अपराध किए वह मानवता की श्रेणी में नहीं आता हैं।
इस मामले की औपचारिक शुरुआत 11 सितंबर 2024 को हुई थी जब ट्रिब्यूनल में केस दर्ज किया गया था। कुल 16 आरोपियों में से केवल 8 को ही गिरफ्तार किया जा सका था जिनमें पूर्व अतिरिक्त एसपी अब्दुल्लाहिल काफी और शाहिदुल इस्लाम जैसे बड़े नाम शामिल थे। 21 अगस्त 2024 को इन पर औपचारिक रूप से आरोप तय किए गए थे।
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मुकदमे के दौरान कांस्टेबल शेख अब्जलुल हक ने अपना गुनाह कबूल कर लिया जिसके बाद उन्हें ‘राज्य गवाह’ बनाया गया था। शेष आरोपियों के खिलाफ सुनवाई पूरी होने के बाद आज यह कड़ा फैसला सुनाया गया। यह फैसला बांग्लादेश की वर्तमान अंतरिम व्यवस्था और न्याय प्रणाली के लिए एक बड़ी जीत माना जा रहा है क्योंकि यह सीधे तौर पर शेख हसीना के कार्यकाल के दौरान हुए दमन से जुड़ा है।






